*ऐसी भाषा मत बोलिएं जो परिवार, समाज व राष्ट्र में महाभारत का कारण बन जाए-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*अहंकार में ऐसी भाषा का उपयोग मत करो जो हमारे लिए कर्मों का बंधन बंध जाए*
*माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में नियमित चातुर्मासिक प्रवचन*
भीलवाड़ा:निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ),22 सितम्बर। जीवन में वह नहीं होता जो हम चाहते है बल्कि वही होता है जो परमात्मा चाहता है। ऐसे में परमात्मा से मिल रहा है उसी में खुश रहना सीखे। हमे चिंतन करना चाहिए कि हमारे बोले गए शब्दों का बहुत महत्व है।एक शब्द से किसी को खुशी को एक शब्द से किसी को दुःख मिलता है। ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करे जो किसी के लिए दुःख का कारण बने। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत मंगलवार को नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।
आचार्य रामदयाल महाराज ने जीवन में संयमित भाषा का उपयोग करने ओर किसी तरह का अहंकार नहीं करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हंस हंसकर किए जाने वाले कर्म भविष्य में फूट फूटकर रूलाते है। हमारी वाणी के कारण ही व्यक्ति,परिवार,समाज व राष्ट्र टूटता है इसलिए हमेशा सोच समझकर बोलना चाहिए। शब्द ही महाभारत का कारण बनते है। यदि द्रोपदी दुर्योधन को अंधे का पुत्र अंधा जैसा वचन नहीं बोलती तो महाभारत नहीं होती। शब्दों के कारण ही राम की धरती पर संग्राम होता है। हमे कुछ भी बोलने से पहले उसके परिणामों पर विचार अवश्य करना चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि अहंकार में ऐसी भाषा का उपयोग मत करो जो हमारे लिए कर्मों का बंधन बंध जाए। विवेकपूर्वक बुद्धि से कार्य करना चाहिए। यदि जीवन की सत्ता हमारे हाथ में नहीं रही तो अन्य कोई सत्ता भी हाथ में नहीं रहने वाली है। सभी सत्ता का नियंत्रण परमात्मा के हाथ में होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में चरित्र का बहुत महत्व है। राम का चरित्र ज्ञान व मर्यादा का पाठ पढ़ता है तो भरत का चरित्र प्रेम का पाठ पढ़ाता है। रामायण के सभी पात्रों में विलक्षण तत्व है। भगवान के प्रति हमारे मन में दृढ़ आस्था व श्रद्धा होनी चाहिए।
आचार्य रामदयाल महाराज ने जलझुलनी एकादशी पर्व की बधाई देते हुए कहा कि भगवान से प्रार्थना है कि वह जल में खूब झूले ओर भीलवाड़ावासियों पर भी जल बरसाने की कृपा करे। उन्होंने दिल्ली में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म की घटना की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटना निंदनीय होने के साथ रोंगेट खड़े कर देने वाली है। सड़क पर सरेआम ऐसी घटनाएं होना चिंताजनक है। आचार्यश्री ने नगरीय निकाय चुनावों में महापौर व अध्यक्ष चुने गए जनप्रतिनिधियों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वह समर्पित भाव से सेवा करते हुए जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरेंगे।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। एकादशी होने से दोपहर में वितराग वाणी का सामूहिक पाठ किया गया। विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत 25 सितम्बर को रामद्वारा धाम में भजन संध्या का आयोजन होगा। आचार्य रामदयालजी महाराज का अवतरण दिवस 26 सितम्बर को आनंदोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। रामद्वारा धाम में 27 सितम्बर को विराट संत सम्मेलन का आयोजन होगा। इसी दिन दोपहर 2 से 5 बजे तक वाणीजी का सामूहिक पाठ कर एक पखवाड़े चलने वाले वाणीजी सामूहिक पाठ का शुभारंभ होगा। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सुबह 9 से 10 बजे तक चातुर्मासिक प्रवचन हो रहे है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।