चंबा में मुफ्त जांच सुविधा पर संकट! डॉक्टर की पर्ची हाथ में, निजी लैब में खर्च करने को मजबूर मरीज
कंपनी ने लंबित भुगतान का हवाला देकर रोकी सेवाएं, करीब एक करोड़ रुपये की बकाया राशि होने का दावा
चंबा, 3 नवंबर 2026।
सरकारी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीजों को उम्मीद रहती है कि जरूरी जांच भी अस्पताल में ही निशुल्क हो जाएगी, लेकिन जिला चंबा में इन दिनों मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज चंबा से लेकर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक निशुल्क जांच व्यवस्था प्रभावित होने से मरीजों को निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है।
मरीजों के हाथ में डॉक्टर की जांच पर्ची है, लेकिन क्रसना लैब में नमूने नहीं लिए जा रहे। ऐसे में इलाज करवाने पहुंचे लोगों को मजबूरी में निजी लैब में पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। जिन जांचों की सुविधा सरकारी व्यवस्था के तहत निशुल्क मिलनी थी, उनके लिए अब मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
कंपनी प्रबंधन के निर्देश पर नमूने लेने से किया मना
पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में क्रसना लैब की सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि कंपनी प्रबंधन ने लंबित भुगतान का हवाला देते हुए जांच सेवाएं रोक दी हैं। बकाया राशि करीब एक करोड़ रुपये के आसपास होने का दावा किया जा रहा है।
लैब में पहुंचे मरीजों को कर्मचारियों की ओर से जांच नहीं होने की जानकारी दी गई। इस कारण कई मरीजों को बिना जांच करवाए वापस लौटना पड़ा, जबकि कुछ लोगों ने समय की जरूरत को देखते हुए निजी लैब में जांच करवाना उचित समझा।
सरकारी लैब में जांच जारी: चिकित्सा अधीक्षक
मामले पर मेडिकल कॉलेज चंबा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि कृष्णा लैब की सेवाएं बंद होने के कारण मरीजों को परेशानी आई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी लैब में मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल: भुगतान की लड़ाई में मरीज क्यों भुगतें?
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।
1. यदि कंपनी का भुगतान लंबित है तो इसके लिए जिम्मेदार विभागीय व्यवस्था कौन है?
2. करीब एक करोड़ रुपये की बकाया राशि के दावे की आधिकारिक पुष्टि कब होगी?
3. निशुल्क जांच सुविधा बाधित होने पर मरीजों को वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं मिल रही?
4. गरीब और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के अतिरिक्त खर्च की भरपाई कौन करेगा?
5. स्वास्थ्य विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक करेगा?
TRIBAL LIVE NEWS का सवाल
स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता की बुनियादी जरूरत हैं। सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने आने वाले मरीजों को जांच के लिए निजी लैबों के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह व्यवस्था की समीक्षा का विषय है।
कंपनी और विभाग के बीच भुगतान का विवाद अपनी जगह है, लेकिन मरीजों को मिलने वाली निशुल्क जांच सुविधा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि मामले का समाधान कर मरीजों के लिए जांच व्यवस्था सुचारू बनाई जाए।
Chamba, Chamba | Nov 3, 2026