धान में पीलापन और झुलसने से किसान चिंतित, चूसक कीटों का बढ़ा प्रकोप
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को किया सतर्क, एक एकड़ में 12 स्प्रे पंप के हिसाब से दवा छिड़काव की सलाह
डिंडौरी जिले में इन दिनों धान की फसल में पीलापन आने और पौधों के झुलसने की समस्या से किसान चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेतों में रस चूसक कीटों, विशेषकर भूरे एवं सफेद फुदके का प्रकोप देखने को मिल रहा है। ये कीट पौधों के निचले हिस्से से रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पौधे कमजोर होकर पीले पड़ सकते हैं।
किसानों की समस्या को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र डिंडौरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी.एल. अंबूलकर ने किसानों को धान की फसल की नियमित निगरानी करने और कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है।
दो दवाओं में से किसी एक का ही करें उपयोग
वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार चूसक कीटों के नियंत्रण के लिए एक एकड़ क्षेत्र में 12 स्प्रे पंप के हिसाब से निम्न में से किसी एक दवा का अनुशंसित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है—
थायमेथोक्सम 25 WG — 80 ग्राम प्रति एकड़
इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL — लगभग 60 मिलीलीटर प्रति एकड़
किसानों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि दोनों दवाओं का एक साथ उपयोग न करें। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों में से किसी एक दवा का ही अनुशंसित मात्रा में छिड़काव किया जाना चाहिए।
कृषि वैज्ञानिकों ने बिना विशेषज्ञ की सलाह के अलग-अलग रसायनों को मिलाकर छिड़काव नहीं करने तथा दवा के लेबल पर दिए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
अधिक प्रकोप पर 10 से 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव की सलाह
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गीता सिंह ने बताया कि यदि फसल में कीटों का प्रकोप अधिक बना रहता है तो मौसम की स्थिति को देखते हुए 10 से 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने अनावश्यक रूप से बिना परामर्श रसायनों का उपयोग करने से बचने की सलाह दी है।
नीमास्त्र और जीवामृत के उपयोग पर भी जोर
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक उपाय अपनाने की भी सलाह दी है। किसानों से नीमास्त्र तैयार कर उपयोग करने तथा खाद के रूप में जीवामृत का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। इससे फसल प्रबंधन में रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
लगातार फसल की निगरानी जरूरी
विशेषज्ञों ने किसानों से धान के खेतों की लगातार निगरानी करने की अपील की है। पौधों में अचानक पीलापन, झुलसने के लक्षण या चूसक कीटों की संख्या बढ़ती दिखाई देने पर तत्काल कृषि विशेषज्ञ अथवा कृषि विभाग से सलाह लेकर नियंत्रण उपाय अपनाने को कहा गया है। समय पर कीट नियंत्रण नहीं होने पर धान की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
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