संत रविदास जी का मानना था कि धर्म किसी एक जाति का नहीं, बल्कि सभी के लिए समान- राज्यमंत्री श्री लोधी
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रविदास जी के संदेश ‘सबको अन्न, सब समान’ को जन-जन तक पहुंचा रही यात्रा
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संत रविदास जी की जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी, जल और गुरु ग्रंथ के साथ गांव-गांव पहुंच रही कलश यात्रा
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राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के नेतृत्व में निकली समरसता संकल्प यात्रा
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संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर समरसता संकल्प अभियान के तहत कलश वंदन यात्रा निकाली जा रही है। प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्य विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी के नेतृत्व में यह यात्रा जिले के विभिन्न ग्रामों में पहुंच रही है।
यात्रा के दौरान जिन-जिन ग्रामों में संत रविदास जी के मंदिर स्थापित हैं, वहां पहुंचकर कलश की स्थापना की जा रही है तथा विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया जा रहा है। यात्रा में संत रविदास जी की जन्मस्थली से लाई गई पवित्र मिट्टी एवं जल के साथ गुरु ग्रंथ की स्थापना भी की जा रही है। इसके माध्यम से संत रविदास जी के विचारों, समरसता और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
‘ऐसा चाहूं राज मैं, मिले सभी को अन्न’
राज्यमंत्री श्री लोधी ने कहा कि संत रविदास जी ने समाज को समरसता और समानता का संदेश दिया। उनका मानना था कि धर्म किसी एक जाति का नहीं, बल्कि सभी के लिए समान है। संत रविदास जी के प्रसिद्ध संदेश “ऐसा चाहूं राज मैं, मिले सभी को अन्न, छोट-बड़ो सम बसै, रविदास रहे प्रसन्न” में समानता और सामाजिक समरसता की भावना निहित है।
उन्होंने कहा संत रविदास जी ऐसे समाज की कल्पना करते थे, जहां प्रत्येक व्यक्ति को भरपेट भोजन मिले, किसी प्रकार का भेदभाव न हो तथा छोटा-बड़ा सभी समान रूप से रहें। समाज में समानता और भाईचारा स्थापित होने पर ही सच्ची समरसता कायम होगी।
श्री लोधी ने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश एवं देश में संत रविदास जी के विचारों और उनके समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
तृतीय दिवस में 14 ग्रामों में पहुंची यात्रा
समरसता संकल्प कलश वंदन यात्रा के तृतीय दिवस का शुभारंभ सांगा ग्राम से हुआ। इसके बाद यात्रा पांजी, पिडरई, रामादेही, तेंदूखेड़ा, धनगौर, समनापुर, तारादेही, खमरिया शिवलाल, बांसी, सर्रा, कुंदपुरा और धनेटा सहित कुल 14 ग्रामों में पहुंची।