निष्पक्ष जांच और न्याय की अपील,,
दिनांक 11 सितंबर 2026 को अमसारी निवासी निशा की ओर से कोतवाली रुद्रप्रयाग में तहरीर दी गई कि उनके पिता मदनलाल पर कुंदन राका बिष्ट (बेला), जयपाल एवं राजूलाल, दोनों निवासी अमसारी, द्वारा धारदार हथियार से गर्दन पर हमला किया गया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने तीनों नामजद व्यक्तियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने 11 सितंबर को ही तीनों नामजद व्यक्तियों को पूछताछ के लिए कोतवाली रुद्रप्रयाग बुलाया। इसके बाद पुलिस द्वारा करीब तीन दिनों तक मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच और पूछताछ की गई। घायल मदनलाल से बेस अस्पताल श्रीनगर में भी पूछताछ की गई। विवेचना के दौरान उनके बयानों में अंतर सामने आने की बात कही गई। बाद में उन्होंने केवल कुंदन बिष्ट का नाम लिया तथा अन्य दो नामजद व्यक्तियों की संलिप्तता से इनकार किया।
विवेचना के क्रम में पुलिस ने बेला गांव में भी कई लोगों से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि कुंदन बिष्ट करीब 11:30 बजे अपने घर पहुंच गया था और इसके बाद घर पर ही मौजूद था।
मामले की जांच केवल मौखिक बयानों तक सीमित नहीं रखी गई, बल्कि उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की गई। पुलिस की जांच के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में मदनलाल के नशे की हालत में अपनी गाड़ी का दरवाजा खोलते समय खाई में गिरने की घटना सामने आने की बात कही गई है।
विवेचना के बाद 14 सितंबर 2026 को दोपहर में तीनों व्यक्तियों को पुलिस द्वारा छोड़ दिया गया। इसके बाद उसी शाम भीम आर्मी के नेतृत्व में अमसारी के कुछ लोगों द्वारा कोतवाली रुद्रप्रयाग में प्रदर्शन किया गया तथा विशेष रूप से कुंदन राका बिष्ट की गिरफ्तारी की मांग उठाई गई।
सवाल निष्पक्ष जांच का है-
ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब प्रारंभिक तहरीर में तीन व्यक्तियों के नाम दर्ज किए गए थे, तो विवेचना के बाद केवल कुंदन राका बिष्ट की गिरफ्तारी की मांग क्यों की जा रही है? यदि जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता संदिग्ध अथवा असिद्ध पाई जाती है, तो उसके संबंध में निर्णय भी तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही होना चाहिए।
किसी भी व्यक्ति को उसकी सामाजिक पहचान, जातिगत पहचान, गांव अथवा किसी संगठन के दबाव के आधार पर दोषी मान लेना न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हो सकता। कानून की नजर में प्रत्येक व्यक्ति समान है और किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों एवं निष्पक्ष विवेचना के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
यदि सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्ष परिस्थितियों और पुलिस विवेचना में घटना को लेकर अलग तथ्य सामने आते हैं, तो उन साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच और न्यायिक परीक्षण आवश्यक है। किसी व्यक्ति को केवल आरोप या दबाव के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं है।
कुंदन राका बिष्ट के पक्ष में निष्पक्ष जांच की अपील
हम सभी जिम्मेदार नागरिकों से अपील करते हैं कि इस मामले में भावनाओं, सामाजिक या सामूहिक दबाव के बजाय तथ्यों और साक्ष्यों पर विश्वास किया जाए। यदि उपलब्ध जांच और साक्ष्यों के आधार पर कुंदन राका बिष्ट की घटना में संलिप्तता प्रमाणित नहीं होती है, तो उसके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए।
न्याय किसी जाति, गांव या संगठन का नहीं होता। न्याय केवल सत्य, निष्पक्षता और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।