पैसे दो... या बेटी भेजो, रायबरेली में बारिश ने गरीब दादी मां का कच्चा मकान गिरा दिया,छत गई,घर गया,लेकिन उम्मीद थी कि सरकारी राहत मिलेगी.....!
आरोप है कि मौके पर पहुंचे लेखपाल दिनेश कुमार ने रिपोर्ट लगाने के बदले पैसे मांगे,दादी ने कहा पैसे नहीं हैं,आरोप है कि इसके बाद लेखपाल ने पास खड़ी बेटी की तरफ इशारा करते हुए कहा....!
इन्हें भेज दो सोचिए,जिस महिला का घर बारिश में गिर गया,जिसके पास दो वक्त की रोटी का इंतजाम मुश्किल है,उससे अगर सरकारी रिपोर्ट के लिए पैसे मांगे जाएं तो गरीब जाए तो जाए कहां....?
लेकिन कहानी में Twist तब आया,जब दादी ने शिकायत की और प्रशासनिक जांच में आरोपों को निराधार और झूठा बताया गया।
अब असली सवाल यही है👇
दादी झूठ बोल रही हैं तो उनकी शिकायत की जांच कैसे हुई?आरोप झूठे हैं तो गरीब महिला को सरकारी राहत क्यों नहीं मिली? और अगर सिस्टम सही है......!
तो गरीब को अपनी बात साबित करने के लिए आखिर किस दरवाजे पर जाना पड़ेगा? सरकारी नौकरी जनता की सेवा के लिए है,मजबूर इंसान की मजबूरी का फायदा उठाने के लिए नहीं......!
मलकेगांव की दादी को राजनीति नहीं,इंसाफ चाहिए,सवाल पूछना जरूरी है,क्योंकि चुप्पी अक्सर भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी ताकत बन जाती है......!