आधारभूत संरचना निर्माण कार्यों की उपायुक्त ने की समीक्षा, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश
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विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों एवं पंचायत भवनों तक पहुंच पथ निर्माण को प्राथमिकता देने पर जोर
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पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में विभिन्न कार्यकारी विभागों के माध्यम से संचालित आधारभूत संरचना निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त श्री उत्कर्ष कुमार सहित पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, लघु सिंचाई प्रमंडल, भवन प्रमंडल, एनआरईपी, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल एवं ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता तथा कनीय अभियंता उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में विभिन्न कार्यकारी विभागों को टाइड, अनटाइड तथा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट मद के अंतर्गत आवंटित योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की। इस क्रम में स्वीकृत योजनाओं की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की प्रगति, योजनाओं की उपयोगिता तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पूर्व में स्वीकृत सभी योजनाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं, बल्कि आमजन को उसका वास्तविक लाभ उपलब्ध कराना होना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभागों के पदाधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करें तथा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और उपयोगिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
◆ सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़ी योजनाओं को मिलेगी प्राथमिकता
नई योजनाओं के चयन एवं क्रियान्वयन के संबंध में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, पंचायत भवनों तथा आर्थिक गतिविधियों से जुड़े अन्य भवनों तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए पहुंच पथ निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों तक पहुंच मार्ग उपलब्ध होने से विद्यार्थियों, बच्चों, मरीजों, ग्रामीणों तथा अन्य लाभार्थियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और सरकारी संस्थानों की सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी नई योजना को स्वीकृति देने से पहले उसकी आवश्यकता एवं उपयोगिता का समुचित आकलन किया जाए। योजना का चयन स्थानीय आवश्यकताओं, जनहित तथा उसके संभावित लाभ को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके और योजनाओं का लाभ लक्षित समुदाय तक पहुंचे।
◆ निर्माण के साथ रखरखाव एवं गुणवत्ता पर भी विशेष जोर
उपायुक्त ने कहा कि योजनाओं के निर्माण के साथ-साथ उनके उचित रखरखाव की व्यवस्था भी आवश्यक है। इस संबंध में उन्होंने निर्देश दिया कि पूर्ण होने वाली योजनाओं की मेंटेनेंस अवधि सुनिश्चित कराई जाए, ताकि निर्माण के बाद सामने आने वाली संभावित त्रुटियों का समय रहते निराकरण किया जा सके और परिसंपत्तियों की उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि योजना पूर्ण होने के उपरांत सक्षम स्तर के पदाधिकारी से उसका विधिवत निरीक्षण एवं जांच सुनिश्चित की जाए। जांच में निर्धारित गुणवत्ता मानकों तथा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप कार्य संपन्न होने की पुष्टि के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। इस व्यवस्था से निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
◆ भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद ही हो योजना की स्वीकृति
बैठक में उपायुक्त ने भूमि से संबंधित समस्याओं को योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बनने से रोकने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी योजना को स्वीकृति प्रदान करने से पूर्व संबंधित स्थल पर भूमि की उपलब्धता एवं उपयुक्तता सुनिश्चित कर ली जाए। इससे योजना स्वीकृत होने के बाद भूमि विवाद, स्थल चयन अथवा अन्य संबंधित समस्याओं के कारण निर्माण कार्य में विलंब की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।
उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों के अभियंताओं को योजनाओं की नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी आधारभूत संरचना योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जिला विकास की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसलिए सभी संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरतापूर्वक निर्वहन करते हुए योजनाओं को गुणवत्तापूर्ण, उपयोगी एवं टिकाऊ स्वरूप में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें।
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