महिला सशक्तिकरण को लेकर वृक्षित फाउंडेशन ने किया नुक्कड़ नाटक
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों और सामाजिक मानसिकता पर किया प्रहार
उरई। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को वृक्षित फाउंडेशन द्वारा गांधी चबूतरा, उरई में महिला सशक्तिकरण एवं महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर होने वाली परेशानियों तथा उनके सामने आने वाली गंभीर चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार महिलाओं को सड़क पर ईव-टीजिंग और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले अनुचित व्यवहार और उत्पीड़न के मुद्दे को भी उठाया गया।
नुक्कड़ नाटक के दौरान प्रेम प्रस्ताव ठुकराने पर महिलाओं पर होने वाले एसिड अटैक की भयावह स्थिति को भी प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने यह संदेश दिया कि किसी महिला का किसी प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करना उसका व्यक्तिगत अधिकार है और इसके लिए उसके साथ हिंसा या प्रताड़ना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
नाटक के एक अन्य दृश्य में रात के समय महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे को दर्शाया गया, जिसमें *बलात्कार और हत्या जैसी जघन्य घटनाओं* के माध्यम से समाज को सोचने और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया।
वृक्षित फाउंडेशन के अध्यक्ष हर्ष शर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं को अधिकार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा सुरक्षित और सम्मानजनक समाज बनाना भी आवश्यक है, जहां महिलाएं बिना भय के अपने घर, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से रह सकें।
नुक्कड़ नाटक में वृक्षित फाउंडेशन के स्वयंसेवकों सोम सूर्य, अनुष्का, काजल, पारुल, रक्षा, निकिता, अभय, कृष्ण, साहिल, हर्ष, तनिष्का सहित अन्य स्वयंसेवकों ने अभिनय कर सामाजिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से लोगों से महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों के प्रति जागरूक होने तथा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाने की अपील की गई।
कार्यक्रम के अंत में वृक्षित फाउंडेशन ने लोगों से आह्वान किया कि महिला सुरक्षा केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। एक सुरक्षित और समान समाज के निर्माण के लिए हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी।
Orai, Jalaun | Oct 4, 2026