करीब 10 साल बीत चुके हैं, लेकिन शशिकांत की जिंदगी बिस्तर तक सिमटकर रह गई है। कभी कंप्यूटर प्रशिक्षण की पढ़ाई कर अपने भविष्य के सपने देखने वाला यह युवक अब अपने माता-पिता पर पूरी तरह निर्भर है।
शशिकांत के मुताबिक, 11 नवंबर 2016 को आईटीआई से छुट्टी के बाद अपने गांव देवपुर लौटते समय दुकली-गचकन्हार के पास उसके साथ मारपीट की घटना हुई। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और वह लकवाग्रस्त हो गया। डॉक्टरों के मुताबिक उसे सर्वाइकल इंजरी की समस्या है।
शशिकांत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। पिछले 10 वर्षों से इलाज और बेहतर जिंदगी की उम्मीद में वह संघर्ष कर रहा है।
अब शशिकांत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है।
शशिकांत की मांग बहुत बड़ी नहीं है...
वह सिर्फ इतना चाहता है कि उसका बेहतर इलाज कराया जाए और उसे दोबारा सामान्य जिंदगी जीने का एक मौका मिले।
उसने दिल्ली के ESIC अस्पत�
Korba, Korba | Sep 1, 2026