मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है। परिवार की गाड़ी खींचने के लिए अपनी पढ़ाई कुर्बान करने वाले एक 20 साल के युवा की रोजी-रोटी पर नगर निगम की कार्रवाई ने ताला जड़ दिया है। अरेरा कॉलोनी के बेसमेंट में बनी एक छोटी सी दुकान अब बंद हो चुकी है, और इस परिवार के पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं बचा है।
देवेंद्र शाहदेव की जिंदगी ने तब अचानक यू-टर्न लिया जब उनके 57 वर्षीय पिता रमेश को पैरालिसिस (लकवा) का गंभीर दौरा पड़ा। इस बीमारी के बाद रमेश इलेक्ट्रीशियन का काम करने में पूरी तरह असमर्थ हो गए। घर में चूल्हा जलता रहे, इसके लिए 12वीं पास कर चुके देवेंद्र ने कॉलेज जाने का सपना छोड़ दिया और अपने पिता के औजार थाम लिए। वह अरेरा कॉलोनी के ई-3 ब्लॉक में एक आवासीय इमारत के बेसमेंट की छोटी सी दुकान में इलेक्ट्रीशियन का काम करने लगा था।
सोमवार की सुबह देवेंद्र के लिए एक बड़ा झटका लेकर आई। दुकान मालिकों को 24 घंटे का अ
Korba, Korba | Sep 1, 2026