गांव के भोले-भाले और सीधे-साधे लोगों को अपना निशाना बनाने के लिए आखिर यह कैसा डॉक्टरों का नेटवर्क गांव-गांव घूम रहा है! फ्री मेडिकल कैंप के नाम पर लोगों के भरोसे और उनकी मजबूरी से कमाई की जा रही है!
ये लोग लैपटॉप के साथ एक फिंगर डिवाइस जोड़कर,
महिलाओं की उंगलियों की स्कैनिंग करवाते हैं! फिर लैपटॉप में बॉडी स्कैन का कोई ऐप खोलकर शरीर में न जाने कितनी तरह की बीमारियां बताने लगते हैं! और इस जांच के नाम पर 50 रुपये भी लिए जाते हैं!
इसके बाद जब महिलाएं दवाइयां खरीदती हैं तो उनसे 300 से 400 रुपये तक वसूले जाते हैं, जबकि सवाल यह है कि जिन सामान्य दवाइयों के पत्ते बाजार में 10 या 20 रुपये के आसपास मिल सकते हैं, उनके लिए गरीब ग्रामीणों से इतनी रकम क्यों ली जा रही है!
गांवों में आज भी सस्ते और आसान इलाज के नाम पर लोगों की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाया जा रहा है! और सबसे गंभीर सवाल यह है कि महिलाओं की उंगलियों की स्कैनिंग आखिर किस उद्देश्य से की जा रही है? मुझे यह आशंका जरूर होती है कि कहीं इस तरह लिए जा रहे फिंगरप्रिंट या डेटा का गलत इस्तेमाल करके किसी तरह का फ्रॉड तो नहीं किया जा सकता? इसकी सच्चाई और जांच होना बेहद जरूरी है!
Hardoi, Hardoi | Sep 6, 2026