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त्रयोदशी पर अपनों ने खुद संवारी राह, बदहाल सड़क ने फिर खोली विकास की पोल आटा। जनपद जालौन में आटा क्षेत्र के कुइया झोर में बारिश के बीच बदहाल रास्ते ने ग्रामीणों की मुश्किलें एक बार फिर सामने ला दीं। 5 अगस्त को सरमन निषाद की मौत के बाद सोमवार को उनकी त्रयोदशी थी। रिश्तेदारों और परिचितों के पहुंचने से पहले परिजनों को ही कीचड़ और मलबे से पटे रास्ते को साफ करने के लिए फावड़े उठाने पड़े। बारिश के कारण कच्चा मार्ग कई जगह दलदल में तब्दील हो गया था, जिससे पैदल निकलना भी मुश्किल था। त्रयोदशी में शामिल होने आने वाले लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए परिजनों ने रास्ते से कीचड़ और मलबा हटाकर आवागमन लायक बनाया। रास्ता साफ होने के बाद ही लोगों की आवाजाही सुचारु हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश में कुइया झोर के सामने यही स्थिति बन जाती है। कच्चा मार्ग पानी पड़ते ही फिसलन और दलदल में बदल जाता है, जबकि नालों में पानी बढ़ने पर कई स्थानों पर रास्ता पार करना भी मुश्किल हो जाता है। बदहाल रास्ते का असर सबसे ज्यादा मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और किसानों पर पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक सरमन की मौत के बाद से सड़क का मुद्दा लगातार उठ रहा है, लेकिन त्रयोदशी के दिन भी परिजनों को खुद फावड़ा चलाकर रास्ता तैयार करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यह तस्वीर गांव में सड़क की जरूरत और विकास के दावों के बीच की हकीकत सामने रखती है। कुइया झोर को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए करीब 2.20 किलोमीटर संपर्क मार्ग प्रस्तावित है। संभावित संरेखण में निजी काश्तकारों की भूमि आने की बात सामने आई है। भूमि की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सर्वे और पैमाइश की प्रक्रिया चल रही है तथा संबंधित किसानों से प्रशासन की ओर से बातचीत की जा रही है। मार्ग से जुड़ी वन भूमि की औपचारिकताओं पर भी कार्रवाई होनी है। अधिकारियों की ओर से सर्वे और भूमि संबंधी रिपोर्ट तैयार की जानी है। फिलहाल सड़क निर्माण का स्टीमेट शासन स्तर तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में ग्रामीणों की नजर अब सर्वे, भूमि संबंधी औपचारिकताओं और प्रस्तावित संपर्क मार्ग के निर्माण की अगली कार्रवाई पर टिकी है। - Orai News