श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया करवा चौथ का पर्व, महिलाओं ने पति के हाथ से जल पीकर खोला व्रत
भीलवाड़ा :दिनेश सुवालका
रायला क्षेत्र में अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ का त्योहार पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। स्थानीय निवासी लीला देवी सुवालका ने बताया कि रायला सहित भटेड़ा, डाबला , बल्दरखा घरटा, कुंडिया खुर्द व आसपास के ग्रामीण अंचलों में गुरुवार को नवविवाहित बहुओं सहित सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखा। करवा चौथ केवल व्रत, चंद्रदर्शन और पति की दीर्घायु की कामना का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प का उत्सव है। रिश्ते की असली खूबसूरती तभी निखरती है, जब पति-पत्नी सुख-दुःख में एक-दूसरे का संबल बनें और परस्पर सम्मान के साथ जीवन की राह पर आगे बढ़ें।
चक्रवर्ती तूफान अर्बन की वजह से करवा चौथ का चांद बादलों की ओट में लुका छुपी करता रहा। जिसकी वजह से व्रती महिलाओं को करना पड़ा चन्द्रोदय का इंतजार बाद में देर रात 09.15 पर चंद्रोदय होने पर महिलाओं ने चौथ माता व करवे की पूजा अर्चना कर व्रत से जुड़ी धार्मिक कथा का श्रवण कर छतों पर जाकर विधि-विधान से पति की पूजा की और छलनी से चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया। इसके बाद महिलाओं ने परंपरा के अनुसार छलनी से अपने पति का चेहरा देखा और पतियों ने अपनी धर्मपत्नियों को अपने हाथों से जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर इस कठिन व्रत का पारण करवाया। ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात तक पूजा-पाठ और चंद्र दर्शन का दौर चलता रहा।