लंपी बीमारी की मार से फिर सहमा गोवंश, गौ किसान समृद्धि ट्रस्ट ने सरकार की उदासीनता पर उठाए सवाल
प्रदेश में फिर बढ़ा लंपी रोग का कहर, लाखों गोवंश पर मंडराया खतरा, पशुपालकों में भय
सरकारें चुनाव में करती है गौरक्षा के दावे, जमीन पर होती है दुर्दशा : महेंद्र सिंह गोदारा
2022 में भी लंपी बीमारी के चलते अनेक गौवंश को हुआ था करोड़ों का नुकसान, फिर भी नहीं जागा विभाग : महेंद्र सिंह गोदारा
भिवानी, 24 सितंबर : प्रदेश में एक बार फिर लंपी त्वचा रोग का प्रकोप बढऩे से गोवंश पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। इस बीमारी के दोबारा सिर उठाने से पशुपालकों और गोभक्तों में भारी चिंता और भय का माहौल बना हुआ है। इस गंभीर स्थिति को लेकर गौ किसान समृद्धि ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह गोदारा ने सरकार और पशुपालन विभाग की कार्यशैली तथा उदासीनता पर कड़ा रोष जताया है।
गौ किसान समृद्धि ट्रस्ट के अध्यक्ष गौभक्त महेंद्र सिंह गोदारा ने कहा कि वर्ष 2022 में फैली लंपी बीमारी ने लाखों गोवंश को लील लिया था। उस समय देश भर के पशुपालकों को हजारों करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। दुधारू गायों पर इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर पड़ा था, जिसके चलते गोवंश की अत्यंत दयनीय स्थिति हो गई थी। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि उस भयानक दौर में भी न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकारों ने गोवंश की बदहाली पर गंभीरता दिखाई और न ही प्रभावित गोपालकों को हुए नुकसान का कोई उचित मुआवजा या भरपाई की। गोदारा ने आरोप लगाया कि खुद को हिंदुत्व और गौ रक्षा का रक्षक बताने वाली सरकारें चुनाव के समय तो गौ संरक्षण के बड़े-बड़े दावे और ढकोसले करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर गौवंश की दुर्दशा को पूरी तरह अनदेखा कर दिया जाता है। अब एक बार फिर लम्पी बीमारी गौवंश को अपना शिकार बनाने लगी है, लेकिन पशुपालन विभाग और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी इस बीमारी का व्यापक फैलाव देखने को मिल रहा है।
महेंद्र सिंह गोदारा ने याद दिलाया कि वर्ष 2022 में भी गौ किसान समृद्धि ट्रस्ट ने इस मुद्दे को लेकर व्यापक स्तर पर आवाज उठाई थी। उस दौरान 400 गांवों में नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गई थीं और विभिन्न जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर बीमारी की रोकथाम की मांग की गई थी। इतना ही नहीं, सीवानी से भिवानी तक एक विशाल पदयात्रा भी निकाली गई थी। इस पदयात्रा में ग्राम स्वराज किसान मोर्चा के संयोजक किसान योद्धा शहीद मंगल सिंह खरेटा और अध्यक्ष जोगेंद्र तालु सहित सैकड़ों गौभक्तों ने भाग लिया था। पदयात्रा के माध्यम से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर यह मांग की गई थी कि भविष्य में हिंदू धर्म की प्रतीक गाय को इस महामारी से बचाने के लिए प्रभावी दवाइयां और वैक्सीन तैयार की जाएं। इसके बावजूद ठोस नीतिगत कदम न उठाए जाने का ही परिणाम है कि आज दोबारा गोवंश खतरे में है।
सरकारी स्तर पर नाकाफी इंतजामात के बीच स्थानीय स्तर पर गोभक्त खुद आगे आकर गोवंश को बचाने के प्रयास में जुटे हैं। गौभक्त हरफूल सिंह जाट जुलानी वाला गौशाला (खावा) में लम्पी बीमारी से ग्रस्त गायों के उपचार के लिए देशी नुस्खों का सहारा लिया जा रहा है। गौशाला संचालक युद्धवीर मंगल सिंह खरेटा लगातार औषधीय काढ़ा तैयार कर बीमार गोवंश को पिला रहे हैं। गौशाला प्रबंधन द्वारा यह देशी काढ़ा सभी गोपालकों और गोसेवकों के लिए पूर्णत: निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। कोई भी पशुपालक खावा गौशाला पहुंचकर अपनी पीडि़त गायों के लिए यह दवा मुफ्त प्राप्त कर सकता है। महेंद्र सिंह गोदारा ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि वह स्थिति की गंभीरता को समझे और अविलंब गांवों में चिकित्सा दल भेजकर टीकाकरण और इलाज की पुख्ता व्यवस्था करे।