पीपीआर से बचाव के लिए पशुपालन विभाग की पहल, क्यूंजा में 193 भेड़-बकरियों का टीकाकरण,,
सात पशुपालकों को मिला अभियान का लाभ, 140 बकरियों और 53 भेड़ों को लगाया गया सुरक्षा टीका,,
रुद्रप्रयाग। पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों की आजीविका का प्रमुख आधार भेड़-बकरी पालन है। पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग ने क्यूंजा क्षेत्र में टीकाकरण अभियान चलाया। अभियान के दौरान सात पशुपालकों की कुल 193 भेड़-बकरियों का टीकाकरण कर उन्हें पीपीआर जैसे संक्रामक रोग से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।
रविवार को आयोजित अभियान के तहत पशु चिकित्सा टीम ने 140 बकरियों और 53 भेड़ों को सुरक्षा टीके लगाए। विभाग की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन को स्वस्थ रखना और बीमारी के प्रसार की आशंका को कम करना है। पहाड़ के कई परिवारों की आर्थिक स्थिति पशुपालन पर निर्भर होने के कारण पशुओं का समय पर टीकाकरण विशेष महत्व रखता है।
संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी,
पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के नेतृत्व और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष रावत के निर्देशों के क्रम में यह अभियान संचालित किया गया। पशु चिकित्सालय क्यूंजा की पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियंका पुंडीर और मोबाइल वेटरनरी यूनिट की प्रभारी डॉ. वंदना ने टीकाकरण कार्य संपन्न कराया।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियंका पुंडीर ने बताया कि पीपीआर भेड़-बकरियों में होने वाला संक्रामक विषाणुजनित रोग है। समय पर बचाव के उपाय नहीं किए जाने पर यह पशुओं के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। बीमारी के कारण पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। ऐसे में नियमित टीकाकरण, पशुओं की निगरानी और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है।
पशुधन की सुरक्षा से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था,
क्यूंजा क्षेत्र में चलाया गया यह अभियान पशुपालकों को पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में विभागीय प्रयासों का हिस्सा है। भेड़-बकरियों में रोगों की रोकथाम होने से पशुपालकों की मेहनत और निवेश को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं और पशुओं के स्वास्थ्य में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखाई देने पर पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें। नियमित देखभाल और समयबद्ध टीकाकरण से पशुधन को सुरक्षित रखने के साथ ग्रामीण परिवारों की आजीविका को भी मजबूती दी जा सकती है।