नडल पंचायत के छोटे-छोटे स्कूली बच्चे ऊबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों से पैदल स्कूल जाते हुए। दुर्गम रास्ते पर खड़ी चढ़ाई और उतराई पार करते बच्चों के शॉट्स,
बाइट, स्कूल जा रहे बच्चों की बाइट।
एंकर:
आजादी के दशकों बाद भी चंबा जिला के कई गांव सड़क सुविधा के इंतजार में हैं। कहीं ग्रामीणों को रोजमर्रा का सामान खच्चरों पर ढोकर ले जाना पड़ रहा है। सर्दी का मौसम हो या फिर कड़कड़ाती सर्दी इन सभी नौनिहाल बच्चों को अपना भविष्य संवारने के लिए रोजाना मौत को चुनौती देते हुए स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। तस्वीरें डलहौजी विधानसभा क्षेत्र की नडल पंचायत की हैं, जहां नडल से जुतरान गांव तक सड़क न होने के चलते छोटे-छोटे बच्चों को करीब चार किलोमीटर का दुर्गम सफर पैदल तय करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि इसकी खबर यहां के पंचायत प्रतिनिधियों के साथ स्कूल प्रशासन और प्रदेश सरकार को भी है पर बाबजूद इसके आखिर इन बच्चों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?
वॉयस ओवर,
चंबा जिला की नडल पंचायत के जुतरान गांव की ये तस्वीरें विकास के दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। यहां सड़क सुविधा न होने का खामियाजा सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। नडल से जुतरान तक करीब चार किलोमीटर का रास्ता आज भी सड़क से नहीं जुड़ पाया है। ऐसे में नन्हे-मुन्ने बच्चों को रोजाना पथरीले रास्तों, खड़ी चढ़ाई और खतरनाक उतराई से गुजरकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। जंगल के बीच से गुजरने वाला यह सुनसान रास्ता बच्चों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
Chamba, Chamba | Nov 2, 2026