पितृपक्ष से पहले ऑनलाइन पिंडदान पर घमासान, 25 से 51 हजार के टूरिज्म पैकेज पर गयापाल समाज ने उठाए सवाल
गया। विश्व प्रसिद्ध पितृतीर्थ गया में पितृपक्ष शुरू होने से पहले ऑनलाइन पिंडदान को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ऑनलाइन माध्यम से पिंडदान कराने की व्यवस्था को लेकर गयापाल समाज की ओर से सवाल उठाए गए हैं। गयापाल समाज का कहना है कि गया में पिंडदान केवल एक ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा और विधि-विधान से जुड़ा कर्मकांड है, जिसमें श्रद्धालु की प्रत्यक्ष मौजूदगी का विशेष महत्व माना जाता है। मामला उस समय चर्चा में आया जब ऑनलाइन पिंडदान के साथ पर्यटन पैकेज की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं के लिए करीब 25 हजार से 51 हजार रुपये तक के टूरिज्म पैकेज की चर्चा है।
गयापाल समाज के लोगों ने इस तरह के पैकेज पर सवाल उठाते हुए कहा कि गया आने वाले श्रद्धालुओं को पिंडदान की वास्तविक धार्मिक प्रक्रिया और पर्यटन पैकेज के बीच अंतर समझना जरूरी है।
गयापाल पुरोहितों का कहना है कि पितरों की शांति और मोक्ष की कामना से किया जाने वाला पिंडदान गया की विभिन्न पवित्र वेदियों पर विधि-विधान से संपन्न कराया जाता है। फल्गु नदी, विष्णुपद और अक्षयवट सहित कई स्थानों का धार्मिक महत्व बताया जाता है। परंपरागत रूप से तीर्थयात्री स्वयं गया पहुंचकर अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करते हैं। इससे पहले भी ऑनलाइन पिंडदान को लेकर गयापाल पुरोहितों और अन्य धार्मिक जानकारों के बीच बहस सामने आ चुकी है। 2023 में भी पितृपक्ष से पहले ऑनलाइन पिंडदान को लेकर विवाद हुआ था। उस समय गयापाल पुरोहितों ने ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि पिंडदान स्वयं श्रद्धालु द्वारा किया जाने वाला कर्मकांड है।
वहीं, डिजिटल माध्यम से पिंडदान की व्यवस्था के समर्थकों की ओर से यह तर्क दिया जाता है कि जो श्रद्धालु किसी मजबूरी के कारण गया नहीं पहुंच सकते, उनके लिए ऑनलाइन या ई-पिंडदान एक वैकल्पिक सुविधा हो सकती है। ऐसी व्यवस्थाओं में वीडियो कॉल के माध्यम से श्रद्धालु को पूजा से जोड़ने और गया में मौजूद पुरोहित द्वारा कर्मकांड कराने का दावा किया जाता है।
हालांकि गयापाल समाज का जोर इस बात पर है कि जो श्रद्धालु गया आ सकते हैं, उन्हें स्वयं गया पहुंचकर पिंडदान करना चाहिए। समाज के लोगों का कहना है कि पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। गया की धार्मिक पहचान ही पिंडदान और श्राद्ध कर्म से जुड़ी हुई है। पिंडदान के साथ पर्यटन पैकेज को जोड़ने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। गयापाल समाज का कहना है कि श्रद्धालुओं को धार्मिक कर्मकांड के नाम पर मिलने वाली सेवाओं, शुल्क और पैकेज की पूरी जानकारी पहले से दी जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पैकेज में धार्मिक अनुष्ठान के अलावा कौन-कौन सी पर्यटन या अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
गया में पितृपक्ष के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध और पिंडदान करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गया को पितरों के श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। यही वजह है कि पितृपक्ष के समय शहर में श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुटती है। ऐसे में ऑनलाइन पिंडदान को लेकर उठे सवालों ने पितृपक्ष शुरू होने से पहले ही धार्मिक और पर्यटन व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि ऑनलाइन पिंडदान और टूरिज्म पैकेज को लेकर संबंधित विभाग तथा गयापाल समाज की ओर से आगे क्या स्पष्टता दी जाती है।
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Gaya Town CD Block, Gaya | Sep 16, 2026