सूचना देने वाले ही पुलिस के शक के घेरे में! ग्रामीणों ने लगाया परेशान करने का आरोप
अज्ञात कार से गांजा बरामदगी के बाद ग्रामीणों से पूछताछ, एसपी कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग
डिंडौरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेंदुमेर मोहत्तरा में अज्ञात कार से गांजा बरामदगी का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस संदिग्ध कार की सूचना उन्होंने पुलिस को दी थी, उसी मामले में अब पुलिस उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए थाने बुला रही है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों ने दी थी संदिग्ध कार की सूचना
ग्रामीणों के मुताबिक 6 अगस्त 2026 को गांव में एक अज्ञात लग्जरी कार खड़ी दिखाई दी थी। संदिग्ध वाहन देखकर ग्रामीणों ने डायल-112 को सूचना दी। इसके बाद शाहपुर थाना प्रभारी को भी वाहन के संबंध में जानकारी दी गई।
ग्रामीणों का दावा है कि सूचना मिलने के करीब एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से करीब चार किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई।
करीब आठ ग्रामीणों से पूछताछ का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि गांजा बरामदगी के बाद गांव के करीब आठ लोगों को पूछताछ के नाम पर बार-बार थाने बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें घंटों थाने में बैठना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान कार की बैटरी, स्टेपनी, गांजा और कथित तौर पर करीब ढाई लाख रुपये को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं।
ढाई लाख रुपये और सामान को लेकर उठे सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब उन्होंने पुलिस को सिर्फ अज्ञात कार खड़ी होने की सूचना दी थी, तो वाहन में कथित रूप से मौजूद ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी के संबंध में पुलिस को जानकारी किस स्रोत से मिली?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन सामानों को लेकर पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो जांच में उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल संदेह के आधार पर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।
एसपी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार
पुलिस की कथित पूछताछ से परेशान ग्रामीण मंगलवार को डिंडौरी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के नाम शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने संदिग्ध वाहन की जानकारी देकर पुलिस की मदद की थी। ऐसे में अब उन्हीं ग्रामीणों के बार-बार पूछताछ के घेरे में आने से गांव में भय का माहौल बना हुआ है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल गांजा बरामदगी के मामले में पुलिस की जांच जारी है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित ढाई लाख रुपये, बैटरी और स्टेपनी को लेकर पुलिस के पास क्या जानकारी या साक्ष्य है और ग्रामीणों से पूछताछ किस आधार पर की जा रही है।
अब पूरे मामले में निगाह वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर है। क्या ग्रामीण महज सूचना देने वाले थे या पुलिस की जांच में उनकी कोई भूमिका सामने आई है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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