*"निंबाहेड़ा बना 'बलि का बकरा'? वंडर सीमेंट के विस्तार को लेकर जनता में भारी रोष*
*वंडर सीमेंट के 1000 करोड़ के मेगा विस्तार प्रोजेक्ट पर उठे सवाल*
*ग्रामीणों का आरोप: जल दोहन, प्रदूषण और झूठे वादों से हो रहा जनजीवन प्रभावित*
* कमलेश आमेटा विशेष संवाददाता*
*जयपुर/निंबाहेड़ा, वंडर सीमेंट द्वारा प्रस्तावित 1000 करोड़ के मेगा विस्तार प्रोजेक्ट को लेकर निंबाहेड़ा और आसपास के क्षेत्र में लोगों द्वारा गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि फैक्ट्री का लगातार विस्तार आम जनजीवन और पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रहा है।
*ग्रामीणों द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप:*
*डार्क जोन में भूजल दोहन:* निंबाहेड़ा को पहले से "डार्क जोन" घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद कंपनी को भारी-भरकम भूजल दोहन की मंजूरी मिलने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भविष्य में नगरवासियों के लिए घातक होगा और CGWB के नियमों का उल्लंघन है।
*ग्रीनबेल्ट पर सवाल:* प्रोजेक्ट में "सघन हरित पट्टी" विकसित करने का दावा किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है।
. *फ्लाई ऐश से खेती को नुकसान:* पावर प्लांट से उड़ने वाली राख सांगरिया, बोराखेड़ी, पीरखेड़ा, रसूलपुरा के खेतों में पहुंच रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उपजाऊ जमीन प्रभावित हो रही है और किसान परेशान हैं।
*रोजगार के वादे अधूरे:* जनसुनवाई में स्थानीय युवाओं को नौकरी देने का वादा किया गया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आज भी युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। वहीं बाहरी लोगों को ज्यादा से ज्यादा इस कंपनी में बढ़ावा मिल रहा है , आखिर क्यों?
*दस्तावेजों पर सवाल:* कुछ लोगों का आरोप है कि पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई है और सभी मंजूरियां जल्दबाजी में दी गई हैं।
*ग्रामीणों के सवाल:*
❓ करोड़ों के प्रोजेक्ट में जनता के स्वास्थ्य और अधिकारों का ध्यान क्यों नहीं रखा जा रहा?
❓ डार्क जोन में भूजल दोहन, प्रदूषण नियंत्रण और वाइल्डलाइफ प्लान जैसी मंजूरियां कैसे मिलीं?
❓ जिम्मेदार विभाग कब तक कार्रवाई करेंगे?
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि फैक्ट्री विस्तार से पहले ब्लास्टिंग की तीव्रता, भूजल दोहन, प्रदूषण नियंत्रण और ग्रीनबेल्ट की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराई जाए। साथ ही प्रभावित परिवारों का सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे लोकतांत्रिक तरीके से बहुत जल्द आंदोलन पर उतरने को मजबूर होंगे।
_नोट: यह प्रेस नोट स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों एवं जनचर्चा पर आधारित है। वंडर सीमेंट कंपनी तथा संबंधित विभागों का पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।_