गाजरघास से सावधान, सेहत और फसल दोनों के लिए खतरनाक
कृषि विज्ञान केंद्र शिवपुरी द्वारा संचालित किया जाा रहा है उन्मूलन अभियान
देशभर में 16 से 22 अगस्त तक 21वां गाजरघास जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में जबलपुर स्थित खरपतवार अनुसंधान संस्थान के निर्देश पर कृषि विज्ञान केंद्र, शिवपुरी द्वारा जिले में गाजरघास को खत्म करने और लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र शिवपुरी के प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार के मार्गदर्शन में केंद्र की टीम सड़कों, स्कूलों और गांवों में जागरूकता रैलियां निकाली जा रही है। किसानों, स्कूली बच्चों और आम लोगों को इस जहरीली घास के खतरों और इसे नष्ट करने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।
गाजरघास एक विदेशी पौधा है जो सन् 1950 के दशक में सर्वप्रथम पूना में देखा गया जो बढ़कर आज देश में 35 मिलियन हैक्टर क्षेत्रफल में फैल चुका है। यह एक वर्ष में 3-4 पीढ़ियों पूरी कर हमेशा फलता-फूलता रहता है एवं खाली भूखण्डों, सड़को, रेलवे लाइनों के किनारों, खेत की मेंढ़ों पर बहुतायत में देखा जा सकता है।
इसके एक पौधा पचास हजार तक बीज पैदा करने की क्षमता रखता है। गाजरघास के दुष्परिणाम से मनुष्य, पशुधन एवं पर्यावरण प्रभावित होकर त्वचा एवं स्वांश सम्बन्धि रोग का जनक भी गाजरघास में पाये जाने वाले पार्थेनीन तत्व बनता है।
इसको नियंत्रण एवं सफाया करने के लिए समन्वित प्रयासों से इसे उखाडते समय हाथो में दस्ताने पहनकर निकाले और कही मिट्टी में दबाऐं। पवार का पौधा जिसे केसिया तोरा भी कहते है यह पौधा प्राकृतिक रूप से गाजरघास का प्रसार को रोकता है। फूल आने से पहले इसे कम्पोस्ट / वर्मीकम्पोस्ट के लिए खाद बनाने में ले सकते है। जैविक नियंत्रण में मैक्सिकन बीटल (जाइगोग्रामा बाइकोलेरेटा) भी गाजरघास को खाकर नष्ट करती है।
रासासनिक नियंत्रण के लिए गैरफसलीय क्षेत्रों में ग्लायफोसेट शाकनाशी दवा का छिडकाव सावधानी पूर्वक कर नष्ट कर सकते है। लेकिन फसलों के साथ होने पर इस दवा का प्रयोग न करे। विशेषज्ञों से परामर्श कर ही अनुशंशित शाकनाशी दवा का छिडकाव करे। अतः इस हानिकारक गाजरघास खरपतवार के बारे में जन जागृति के साथ कृषि विज्ञान केन्द्र, शिवपुरी भी समन्वित नियंत्रण उपयों को अपनाने की अपील करता है।
Department of Agriculture, Madhya Pradesh
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9 views | Shivpuri, Madhya Pradesh | Aug 21, 2026