
31 अगस्त से बंद मोरनी–रायपुर रानी मार्ग को खोलने की मांग, अधिवक्ता पंकज भंवरा ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी
मोरनी। मोरनी–रायपुर रानी मार्ग, विशेषकर पलासरा–भंगार stretch, 31 अगस्त 2026 से बंद होने के कारण क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग बंद होने से ग्रामीणों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, किसानों, वाहन चालकों और आम यात्रियों को आवागमन के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
इस समस्या को लेकर मोरनी निवासी अधिवक्ता पंकज भंवरा ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण विभाग, इंजीनियर-इन-चीफ लोक निर्माण विभाग, उपायुक्त पंचकूला, कार्यकारी अभियंता लोक निर्माण विभाग पंचकूला, एसडीओ लोक निर्माण विभाग मोरनी हिल्स और बीडीपीओ मोरनी हिल्स को ई-मेल एवं स्पीड पोस्ट के माध्यम से विस्तृत रिप्रेजेंटेशन भेजी है।
रिप्रेजेंटेशन में कहा गया है कि मोरनी क्षेत्र पहाड़ी और भूस्खलन प्रभावित इलाका है। बरसात के दौरान सड़क पर बार-बार मिट्टी, मलबा और पत्थर आने के साथ जलभराव की स्थिति बन रही है। पलासरा–भंगार के करीब 9 से 10 किलोमीटर हिस्से को विशेष रूप से खराब स्थिति में बताया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ और मलबा जमा होने से वाहनों, हरियाणा रोडवेज बसों और अन्य सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
अधिवक्ता ने यह भी बताया कि सड़क की समस्या को लेकर पहले 31 मई 2025 को संबंधित अधिकारियों को रिप्रेजेंटेशन दिया गया था। इसके बाद उपायुक्त पंचकूला की ओर से 20 जून 2025 और 5 अगस्त 2025 को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इनमें क्षतिग्रस्त सुरक्षात्मक दीवारों के पुनर्निर्माण, सड़क की मरम्मत व कारपेटिंग, क्रैश बैरियर एवं रिफ्लेक्टर लगाने, सुरक्षा निरीक्षण और अन्य आवश्यक कार्य करने के निर्देश दिए गए थे।
रिप्रेजेंटेशन में मांग की गई है कि लंबित टेंडर प्रक्रिया को बिना किसी और देरी के पूरा किया जाए और मोरनी–रायपुर रानी मार्ग का स्थायी निर्माण निर्धारित समय सीमा में कराया जाए। साथ ही पलासरा–भंगार मार्ग को आवश्यक अस्थायी सुरक्षा उपायों के साथ सुरक्षित तरीके से जल्द खोलने, जल निकासी की व्यवस्था करने, रिटेनिंग व प्रोटेक्टिव वॉल का निर्माण, क्रैश बैरियर व चेतावनी बोर्ड लगाने तथा भूस्खलन के कारणों की तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है।
दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि केवल बार-बार जेसीबी से मलबा हटाना स्थायी समाधान नहीं है। सड़क के लिए उचित ड्रेनेज, स्लोप प्रोटेक्शन, रिटेनिंग स्ट्रक्चर और मजबूत सड़क निर्माण जैसी स्थायी व्यवस्थाएं जरूरी हैं। साथ ही प्रशासन से पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों पर हुई कार्रवाई, टेंडर, स्वीकृतियों और निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट भी मांगी गई है।
अधिवक्ता पंकज भंवरा ने स्पष्ट किया है कि यदि उचित समय में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और सड़क को सुरक्षित तरीके से नहीं खोला गया, तो जनहित, यात्रियों की सुरक्षा और प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए सक्षम न्यायालय अथवा अन्य उचित कानूनी मंच का रुख किया जाएगा।
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