मध्यप्रदेश में सरकार ने खाद की बिक्री पर बड़ा फैसला लेते हुए 14 अगस्त की शाम 7 बजे से आगामी आदेश तक अनुदानित खाद की बिक्री पर रोक लगा दी है। खरीफ सीजन के बीच लिए गए इस फैसले से प्रदेश के करीब 82 लाख पंजीकृत किसानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर धान की खेती करने वाले किसानों को फसल के लिए समय पर खाद नहीं मिलने का डर सता रहा है।
कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने खाद बिक्री रोकने का आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक प्रदेश में विपणन संघ, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों, एमपी एग्रो और निजी उर्वरक विक्रेताओं के बिक्री केंद्रों से अनुदानित खाद की बिक्री नहीं की जाएगी। संबंधित संस्थाओं और बिक्री केंद्रों को आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्टॉक मिलान के लिए बिक्री पर रोक
सरकार ने खाद बिक्री रोकने के पीछे भारत सरकार के iFMS पोर्टल पर दर्ज उर्वरक स्टॉक और खाद विक्रेताओं के पास मौजूद वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान यानी Reconciliation बताया है। विभाग का कहना है कि पोर्टल पर दर्ज स्टॉक और जमीन पर उपलब्ध खाद के आंकड़ों में अंतर को दूर करने के लिए यह प्रक्रिया की जा रही है।
इस प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी कलेक्टरों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को दी गई है। हालांकि, स्टॉक मिलान कब तक पूरा होगा और खाद की बिक्री दोबारा किस तारीख से शुरू होगी, इसकी कोई निश्चित समयसीमा सरकार ने नहीं बताई है।
ई-टोकन के विरोध के बाद आया फैसला
खाद बिक्री पर रोक ऐसे समय लगी है, जब प्रदेश के किसान ई-टोकन व्यवस्था का विरोध कर चुके हैं। किसानों ने 28 और 29 जुलाई को नर्मदापुरम से पैदल भोपाल पहुंचकर दो दिन तक आंदोलन किया था। किसानों का कहना है कि ई-टोकन व्यवस्था के कारण खाद लेने में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसान संगठनों को आशंका है कि यदि बिक्री पर रोक लंबी चली तो खरीफ फसलों को खाद की कमी का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बिक्री बंद रहने के दौरान तत्काल खाद की जरूरत वाले किसानों के लिए सरकार क्या वैकल्पिक व्यवस्था करेगी।
कालाबाजारी का भी खतरा
खाद की बिक्री बंद रहने से कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल प्रदेश में खाद की कालाबाजारी शुरू होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। किसानों का कहना है कि अधिकृत केंद्रों से खाद नहीं मिलने पर उन्हें निजी बाजार का रुख करना पड़ सकता है, जहां महंगे दाम पर खाद मिलने की स्थिति बन सकती है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फसल सरकार के आगामी आदेश का इंतजार नहीं करती। जिस समय फसल को यूरिया और अमोनियम सल्फेट जैसे खाद की जरूरत होती है, उसी समय किसानों को खाद मिलना जरूरी है। उन्होंने स्टॉक मिलान के लिए पूरी बिक्री रोकने को किसानों के हित में नहीं बताया।
प्रदेश में करीब 152 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। ऐसे में यदि खाद बिक्री पर रोक लंबे समय तक जारी रहती है तो किसानों के सामने खरीफ फसलों की जरूरत पूरी करने की चुनौती बढ़ सकती है।
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