
बलिया के सुखपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से फैली गंदगी और सफाई व्यवस्था को लेकर आवाज उठाना स्थानीय युवाओं को भारी पड़ गया। अस्पताल परिसर की सफाई की मांग को लेकर अधिकारियों से शिकायत करने, खुद चंदा जुटाकर सफाई कराने और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने वाले युवाओं के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
युवाओं का आरोप है कि उन्होंने किसी विवाद या व्यक्तिगत विरोध के लिए नहीं, बल्कि मरीजों और तीमारदारों की सुविधा को देखते हुए CHC परिसर की सफाई की मांग उठाई थी। कई बार शिकायत के बावजूद जब अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो युवाओं ने आपस में चंदा जुटाया और अस्पताल परिसर की सफाई कराई। इसके बाद मामले को मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी दर्ज कराया गया।
बताया जा रहा है कि 13 अगस्त से स्थानीय युवा बेरुआरबारी के ADO पंचायत उमेश कुमार सिंह और सुखपुरा के ग्राम सचिव से CHC की सफाई कराने की मांग कर रहे थे। युवाओं का कहना है कि शिकायत के बावजूद जब सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें खुद आगे आकर सफाई करानी पड़ी।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब आरोप है कि ADO पंचायत की ओर से पोर्टल पर सफाई पूरी होने की आख्या भेज दी गई। युवाओं का दावा है कि मौके की वास्तविक स्थिति इससे अलग थी और अस्पताल परिसर में अभी भी कूड़ा-कचरा मौजूद था।
इसी आख्या को लेकर कुछ युवा ADO पंचायत के कार्यालय पहुंचे और सफाई व्यवस्था तथा पोर्टल पर भेजी गई रिपोर्ट को लेकर सवाल किए। युवाओं का आरोप है कि इस दौरान उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई। इसके बाद मामला शिकायत से निकलकर कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया।
खबर के अनुसार, सुखपुरा पुलिस ने ADO पंचायत उमेश कुमार सिंह की तहरीर पर सिंह यादव समेत 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि युवाओं ने कार्यालय पहुंचकर अभद्र व्यवहार किया और बिना अनुमति वीडियो बनाकर उसे इंटरनेट व सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वहीं, मुकदमे में नामजद युवाओं की ओर से लगाए गए आरोप मामले को और गंभीर बना रहे हैं। युवाओं का कहना है कि CHC की सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने पर उनके खिलाफ मारपीट, बदसलूकी और सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका दावा है कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों द्वारा बनाए गए वीडियो में ऐसी किसी घटना का स्पष्ट प्रमाण दिखाई नहीं देता।
युवाओं का सवाल है कि यदि उन्होंने CHC की सफाई को लेकर शिकायत की थी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर मामला उठाया था, तो उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच करने के बजाय मामला उनके खिलाफ मुकदमे तक क्यों पहुंच गया? उनका यह भी आरोप है कि सफाई को लेकर भेजी गई सरकारी आख्या और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच होनी चाहिए।
मामले में सबसे बड़ा सवाल CHC की सफाई व्यवस्था और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भेजी गई आख्या को लेकर उठ रहा है। आखिर अस्पताल परिसर में सफाई की वास्तविक स्थिति क्या थी? क्या पोर्टल पर भेजी गई आख्या मौके की स्थिति के अनुरूप थी? यदि सफाई पूरी हो चुकी थी तो युवाओं को खुद चंदा जुटाकर सफाई कराने की जरूरत क्यों पड़ी? और यदि युवाओं की शिकायत में तथ्य थे, तो उनकी शिकायत पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई?
यह मामला केवल एक मुकदमे तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि इससे सरकारी व्यवस्था में शिकायत करने वाले आम लोगों की भूमिका और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि, युवाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी। ऐसे में अब निगाहें पुलिस की जांच के साथ-साथ CHC की सफाई व्यवस्था और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भेजी गई आख्या की निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं।
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