
सिपाही अजीत कुमार हत्याकांड: आरोपी दरोगा पुष्पा कुमारी पर अवैध वसूली और निजी गिरोह चलाने के गंभीर आरोप, राजगीर में 5 करोड़ का रिसॉर्ट बनाने की थी तैयारी!
पूर्व सहयोगियों के दावे से जांच के दायरे में आया कथित नेटवर्क; शराब तस्करों से सांठगांठ, फर्जी छापेमारी टीम और लाखों की वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी
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नालंदा/राजगीर। मद्यनिषेध विभाग की विशेष जांच इकाई (ईआईबी) के सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले में नामजद सब-इंस्पेक्टर पुष्पा कुमारी को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। उनके पूर्व सहयोगियों ने दावा किया है कि वह राजगीर में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से एक रिसॉर्ट बनाने की तैयारी कर रही थीं। आरोप लगाने वाले पूर्व सहयोगियों के मुताबिक, इसके लिए कथित तौर पर अवैध वसूली, शराब कारोबारियों से सांठगांठ और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किया जाना था।
पूर्व सहयोगियों ने यह भी आरोप लगाया है कि पुष्पा कुमारी अपनी आधिकारिक पुलिस टीम से अलग निजी लोगों का एक समूह रखती थीं। इस समूह में करीब 10 लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। आरोप है कि ये लोग पुलिसकर्मियों की तरह व्यवहार करते थे और छापेमारी जैसी कार्रवाइयों में उनके साथ रहते थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच एजेंसियों के निष्कर्ष सामने आना भी जरूरी है।
सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले के बीच सामने आए इन आरोपों ने पुलिस और मद्यनिषेध विभाग की कार्यप्रणाली, छापेमारी के तौर-तरीकों तथा कथित अवैध वसूली के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
निजी टीम बनाकर कार्रवाई करने का आरोप
दरोगा पुष्पा कुमारी के पूर्व सहयोगियों का दावा है कि वह विभाग की आधिकारिक टीम के अतिरिक्त निजी युवकों को अपने साथ रखती थीं। आरोप के मुताबिक, ये लोग कथित तौर पर खाकी वर्दी पहनते थे और उनके पास निजी हथियार भी रहते थे। पूर्व सहयोगियों ने सरकारी राइफल के इस्तेमाल और निजी हथियारों से फायरिंग किए जाने के भी आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि शराब कारोबारियों के ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान यह कथित निजी समूह सक्रिय रहता था। आरोप है कि छापेमारी के दौरान विरोध होने पर गोलीबारी भी की जाती थी। पूर्व सहयोगियों ने दावा किया कि इस तरह की घटनाएं केवल पावापुरी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि हिलसा में तैनाती के दौरान भी कई बार ऐसी परिस्थितियां बनी थीं।
हालांकि, निजी व्यक्तियों के पास हथियार होने, उनके वर्दी पहनकर कार्रवाई में शामिल होने और कथित गोलीबारी की घटनाओं की पुष्टि संबंधित मामलों के रिकॉर्ड, हथियारों की जांच तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से ही हो सकती है।
कांस्टेबल अजीत कुमार की मौत के मामले में गोलीबारी को लेकर दावा
ईआईबी सिपाही अजीत कुमार की मौत से जुड़े घटनाक्रम के बारे में पूर्व सहयोगियों ने दावा किया है कि चलती स्कॉर्पियो के दौरान दोनों तरफ से कई राउंड गोलियां चलाई गई थीं। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम में सरकारी हथियारों के साथ निजी हथियारों के इस्तेमाल की भी आशंका है।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल एक कर्मचारी की मौत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी अभियान के दौरान हथियारों के इस्तेमाल, निजी लोगों की भूमिका और कार्रवाई की वैधानिकता जैसे गंभीर सवाल भी जांच के केंद्र में आ सकते हैं।
हालांकि, गोलीबारी की वास्तविक परिस्थितियों, किसने गोली चलाई, किन हथियारों का इस्तेमाल हुआ और किसकी भूमिका कितनी थी, इसका निर्धारण पुलिस की जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। किसी आरोपी की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
शराब की खेप छोड़ने के बदले 20 लाख रुपये लेने का आरोप
पूर्व सहयोगियों ने पुष्पा कुमारी के कथित नेटवर्क पर शराब कारोबारियों के साथ मिलीभगत करने के भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि शराब की खेप पकड़े जाने के बाद कथित तौर पर मोटी रकम लेकर वाहन या माल को छोड़ने की व्यवस्था की जाती थी।
एक कथित मामले का उल्लेख करते हुए पूर्व सहयोगियों ने आरोप लगाया कि शराब लदे वाहन को छोड़ने के बदले 20 लाख रुपये तक की रकम ली गई थी। हालांकि, इस कथित लेन-देन की तारीख, संबंधित वाहन, रकम के भुगतान के प्रमाण और इसमें शामिल लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुई है।
आरोप यह भी है कि जब्त शराब को कथित तौर पर निजी सहयोगियों के माध्यम से दोबारा तस्करी के लिए उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियां संचालित की जाती थीं। यदि ऐसा हुआ है तो यह सरकारी कार्रवाई की विश्वसनीयता और जब्त सामग्री की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए जब्ती सूची, वाहन से संबंधित दस्तावेज, मालखाने के रिकॉर्ड, केस डायरी, वित्तीय लेन-देन और संबंधित लोगों के बयानों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
शराब पीने के आरोप में पकड़े गए लोगों से भी वसूली का दावा
पूर्व सहयोगियों के मुताबिक, कथित नेटवर्क केवल बड़े शराब कारोबारियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब पीने के आरोप में पकड़े गए सामान्य लोगों को भी कथित तौर पर वाहन में बैठाकर घुमाया जाता था और उन्हें छोड़ने के बदले उनके परिजनों से तीन हजार से साढ़े तीन हजार रुपये तक वसूले जाते थे।
यदि इस तरह की गतिविधियां हुई हैं तो यह कानून के पालन और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में फिलहाल कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित दस्तावेज या आधिकारिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।
जांच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में कथित पीड़ितों के बयान, गिरफ्तारी और रिहाई से जुड़े रिकॉर्ड, संबंधित अधिकारियों की ड्यूटी संबंधी जानकारी तथा किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल अहम हो सकती है।
पांच करोड़ के रिसॉर्ट की योजना और आय से अधिक संपत्ति का सवाल
राजगीर में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से रिसॉर्ट बनाने की तैयारी का दावा इस पूरे प्रकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आया है। पूर्व सहयोगियों का आरोप है कि पुष्पा कुमारी कथित अवैध कमाई से यह संपत्ति तैयार करने की योजना बना रही थीं।
हालांकि, केवल किसी संपत्ति या परियोजना की योजना होने से अवैध कमाई साबित नहीं होती। इस दावे की जांच के लिए यह पता लगाना आवश्यक होगा कि संबंधित जमीन किसके नाम पर है, रिसॉर्ट के निर्माण के लिए कोई समझौता या भुगतान हुआ है या नहीं, परियोजना में किसकी पूंजी लगाई जानी थी और रकम का स्रोत क्या था।
यदि जांच में पुष्पा कुमारी या उनसे जुड़े लोगों की संपत्ति और ज्ञात वैध आय के बीच असंगति सामने आती है तो सक्षम एजेंसियां कानून के प्रावधानों के तहत आय से अधिक संपत्ति के पहलू की जांच कर सकती हैं।
इस मामले में बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों, निवेश, बेनामी स्वामित्व की संभावनाओं और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
हिलसा में तैनाती के दौरान भी विवादों के आरोप
पुष्पा कुमारी के पूर्व सहयोगियों ने दावा किया है कि हिलसा अनुमंडल में तैनाती के दौरान भी उनकी कार्यशैली को लेकर विवाद होते रहे थे। उनके मुताबिक, वहां भी निजी युवकों को कथित तौर पर वर्दी पहनाकर छापेमारी दल में शामिल किया जाता था और अवैध वसूली के आरोप लगते थे।
उपलब्ध कराई गई जानकारी में हिलसा में उनकी तैनाती की अवधि जुलाई 2023 से फरवरी 2026 तक बताई गई है। हालांकि, इन तारीखों और उस दौरान की गई कार्रवाइयों की आधिकारिक सेवा संबंधी जानकारी से पुष्टि की जानी चाहिए।
पूर्व सहयोगियों ने इस्लामपुर थाना क्षेत्र के शरीफाबाद में हुई एक छापेमारी का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, फरवरी 2023 में शराब मामले में ग्रामीणों को पकड़े जाने के विरोध के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और पुलिस टीम को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था।
दावे के मुताबिक, घटना में पांच पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे, सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचा था और टीम को अपनी सुरक्षा के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। इस घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था, इसकी पुष्टि संबंधित प्राथमिकी, पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
हिलसा क्षेत्र में शराब कारोबारियों से कथित तौर पर नियमित मासिक रकम वसूलने के आरोप भी पूर्व सहयोगियों ने लगाए हैं। इन आरोपों की सत्यता और उन पर पहले कोई विभागीय या कानूनी कार्रवाई हुई थी या नहीं, इसकी जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है।
निजी जीवन को लेकर भी जानकारी आई सामने
आरोपी सब-इंस्पेक्टर के निजी जीवन के संबंध में भी कुछ जानकारियां सामने आई हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पुष्पा कुमारी मूल रूप से औरंगाबाद जिले के खखड़ा गांव की रहने वाली बताई गई हैं। उनकी शादी वर्ष 2024 में एक कारोबारी परिवार में हुई थी।
दिए गए विवरण में दावा किया गया है कि शादी के बाद नौकरी जारी रखने और पारिवारिक प्राथमिकताओं को लेकर पति-पत्नी के बीच मतभेद उत्पन्न हुए। शादी के चार दिन के भीतर ही दोनों के बीच अलगाव की स्थिति बन गई थी। पति भी दरोगा था। जिससे तलाक का मामला चल रहा है।
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