
फारबिसगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) रणधीर लाल पर मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज नगर परिषद में ईओ रहते अपने कार्यकाल के दौरान दो करोड़ 75 लाख 68 हजार के कथित गबन का आरोप है।
इस मामले में शनिवार की देर शाम साहेबगंज थाना की पुलिस फारबिसगंज पहुंची और गिरफ्तारी के लिए ईओ के आवास एवं कार्यालय में छापेमारी करती रही, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले हीं ईओ फरार हो गए।
साहेबगंज थाना की पुलिस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से शुक्रवार की देर रात ईओ के आवास पर एवं शनिवार दोपहर नगर परिषद कार्यालय में छापेमारी की, लेकिन वे नहीं मिले। इसके बाद साहेबगंज की पुलिस बैरंग लौट गई।
मुजफ्फरपुर जिले की पुलिस पहुंची
बताया जाता है कि साहेबगंज के तत्कालीन ईओ रणधीर लाल के विरुद्ध साहेबगंज थाना में कथित गबन के आरोप में कांड संख्या 344/26 साहेबगंज के वर्तमान ईओ मो. फिरोज ने दर्ज कराया है। वर्तमान में रणधीर लाल नगर परिषद फारबिसगंज में ईओ हैं।
यदि आरोपित न्यायालय में समर्पण नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध वारंट, कुर्की एवं इश्तेहार की कार्रवाई के लिए न्यायालय से अनुरोध किया जाएगा।
इधर, ईओ की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छापेमारी से नप कार्यालय में हड़कंप की स्थिति बनी रही। शहर में लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि साहेबगंज थाना की पुलिस टीम के फारबिसगंज पहुंचने की सूचना मिलने से पहले ही ईओ रणधीर लाल कैसे फरार हो गए।
छापेमारी अभियान में साहेबगंज पुलिस के अलावा स्थानीय थाना के एसआई अमित राज, उपेंद्र शर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
क्या है मामला?
साहेबगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मो फिरोज के द्वारा विगत 24 अप्रैल 2026 को नगर विकास एवं आवास विभाग के संयुक्त निदेशक शशि भूषण प्रसाद के निर्देश पर साहेबगंज थाना में कांड संख्या 344/26 दर्ज कराया गया है।
दर्ज केस में साहेबगंज के तत्कालीन एवं फारबिसगंज के वर्तमान ईओ रणधीर लाल पर यह आरोप लगाया गया है कि नप ईओ ने साहेबगंज में अपने कार्यकाल के दौरान विभागीय दिशा निर्देश का उल्लंघन करते हुए 3000 पीस स्ट्रीट लाइट, 01 रिफ्यूज काम्पेक्टर, 07 व 20 हाई मास्ट लाईटिंग टावर एवं 50 सीसीटीवी कैमरा का क्रय किया।
इसके बाद कटिहार की एक कंपनी को जिससे क्रय किया गया था। उसे 503 पीस स्ट्रीट लाइट का बिना अधिष्ठापन के ही निविदा में अंकित 3000 पीस स्ट्रीट लाईट का 2 करोड़ 75 लाख 68 हजार 731 रुपया भुगतान महज चार दिनों में कर दिया। जो वित्तीय अनियमितता है।
मामले की जांच करते हुए मुजफ्फरपुर के डीएम ने भी उक्त रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की है।
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