
बढ़ा दर्द ! ठेका मजदूरों के परिवार पर मंडराया मेडिकल संकट, KIMS ने NJCS से मांगा तत्काल हस्तक्षेप
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Bokaro: मजदूर के लिए वेतन सिर्फ महीने के अंत में मिलने वाली रकम नहीं होता। उसी वेतन से घर का चूल्हा जलता है, बच्चों की पढ़ाई होती है और परिवार का भविष्य सुरक्षित करने का सपना देखा जाता है। लेकिन अगर कुछ रुपये की वेतन वृद्धि के साथ उसके परिवार की चिकित्सा सुरक्षा ही छिन जाए, तो सवाल सिर्फ वेतन का नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य का बन जाता है।
##जब कुछ रुपये बढ़े, लेकिन सुरक्षा की ढाल हट गई
बोकारो इस्पात संयंत्र में Skilled और Highly Skilled ठेका मजदूरों को लेकर क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ (KIMS) ने इसी गंभीर चिंता को उठाया है। संघ का कहना है कि AWA सहित वेतन के कुछ घटकों में बढ़ोतरी के बाद बड़ी संख्या में ठेका मजदूर ESIC की निर्धारित वेतन सीमा से बाहर हो गए हैं। इसके साथ परिवार की चिकित्सा सुविधा और Injury Out of Work (IOW) Leave Benefit भी प्रभावित होने की बात कही गई है। इस बाबत क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ (KIMS) के महासचिव डॉ. संग्राम सिंह ने INTUC अध्यक्ष डॉ. जी. संजीवा रेड्डी, AITUC के उपाध्यक्ष विद्या सागर गिरी और भारतीय मजदूर संघ के डी.के. पांडेय को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
##बीमारी दरवाजे पर आए तो मजदूर किसके पास जाएगा?
संग्राम सिंह ने कहा कि - "कल्पना कीजिए, जिस मजदूर ने वर्षों तक संयंत्र में मेहनत कर परिवार का पेट पाला, उसके घर में अचानक कैंसर, हृदय रोग या किसी गंभीर बीमारी की दस्तक दे। इलाज का खर्च लाखों में पहुंच जाए और पहले मिलने वाली संस्थागत चिकित्सा सुरक्षा उपलब्ध न हो। तब वह मजदूर क्या करेगा ? क्या वह अपनी जमीन बेचेगा, मकान गिरवी रखेगा या जीवनभर की बचत इलाज में लगा देगा ?"
##मजदूर की मेहनत, परिवार की चिंता और भविष्य का डर
KIMS का कहना है कि - हर दिन प्लांट में मेहनत करने वाला मजदूर केवल अपना वर्तमान नहीं, अपने पूरे परिवार का भविष्य संभालता है। उसकी चिंता सिर्फ आज की मजदूरी तक सीमित नहीं होती। बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्ग माता-पिता की दवा और अचानक आने वाली बीमारी, इन सबके बीच चिकित्सा सुरक्षा उसके परिवार के लिए एक मजबूत सहारा होती है।
NJCS से उम्मीद, कोई रास्ता जरूर निकले
KIMS महासचिव डॉ. संग्राम सिंह ने NJCS श्रमिक प्रतिनिधियों से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें मजदूर की कुल आय कम न हो और कानूनन संभव होने पर उसे दोबारा ESIC की व्यापक सुरक्षा मिले। KIMS ने स्पष्ट किया है कि मजदूरों का वेतन कम करना उसका उद्देश्य नहीं है। संगठन चाहता है कि वेतन संरचना की ऐसी समीक्षा हो, जिससे मजदूर की वास्तविक आर्थिक स्थिति सुरक्षित रहे और उसे चिकित्सा एवं सामाजिक सुरक्षा से भी वंचित न होना पड़े।
##मजदूर की बीमारी सिर्फ उसकी नहीं, पूरे परिवार की होती है
एक मजदूर के बीमार पड़ने का असर सिर्फ उसकी जिंदगी पर नहीं पड़ता। उसके साथ पूरा परिवार संकट में आ जाता है। कमाई रुकती है, इलाज का खर्च बढ़ता है और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में चिकित्सा सुरक्षा किसी सुविधा से कहीं बढ़कर परिवार के लिए जीवनरेखा बन जाती है।
##वेतन बढ़े, मगर सामाजिक सुरक्षा की कीमत पर नहीं
KIMS की मांग साफ है- मजदूर की आय बढ़े, लेकिन उसकी सामाजिक सुरक्षा की कीमत पर नहीं। जिस हाथ से कारखाने का उत्पादन बढ़ता है, उस हाथ के परिवार को बीमारी के समय असहाय नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
##मजदूर और उसके परिवार की सुरक्षा सबसे पहले
बोकारो के ठेका मजदूरों का यह मुद्दा केवल ESIC कवरेज का तकनीकी सवाल नहीं है। यह उस परिवार की चिंता है, जो हर महीने मजदूर की कमाई पर भरोसा करके अपना भविष्य बनाता है। इसलिए समाधान भी ऐसा होना चाहिए जिसमें वेतन की सुरक्षा के साथ परिवार की चिकित्सा सुरक्षा भी कायम रहे। मजदूर की मेहनत का सम्मान तभी पूरा होगा, जब उसकी बीमारी के समय उसका परिवार भी सुरक्षित रहेगा।
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Chas, Bokaro | Aug 23, 2026