
पूर्व CM अशोक गहलोत ने छोड़ा प्रोटोकॉल: डोल को कांधा देकर मीलों पैदल चले
आरके मार्बल समूह के पितृ पुरुष और प्रख्यात समाजसेवी कंवरलाल पाटनी के अंतिम सफर में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बेहद आत्मीय और सहज रूप देखने को मिला।
किशनगढ़ पहुंचे पूर्व सीएम ने शोकाकुल पाटनी परिवार को ढांढस बंधाया और वीआईपी प्रोटोकॉल दरकिनार कर आम इंसान की तरह दिवंगत कंवरलाल पाटनी की डोल को कांधा दिया। वे अंतिम यात्रा में कई किलोमीटर तक पैदल चले।
मर्यादा और सादगी की मिसाल: धूप और धूल के बीच मीलों पैदल चलते गहलोत को देख लोग भावुक हो उठे। गमगीन माहौल में रास्ते भर खड़े नागरिकों ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया, तो पूर्व सीएम ने भी पूरी शालीनता से सिर झुकाकर हर प्रणाम का उत्तर दिया।
तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद रिश्तों को राजनीति और पद से ऊपर रखना ही अशोक गहलोत की सादगी और जमीन से जुड़ाव की पहचान है।
कांग्रेस और देश की राजनीति में क्यों अलग है ‘गहलोत ब्रांड’?
समकालीन राजनीति में जहां वीआईपी कल्चर, भारी सुरक्षा घेरा और दूरी बनाना आम बात हो गई है, वहीं गहलोत का यह रूप बताता है कि जमीन से जुड़ाव किसे कहते हैं। धूप और धूल के बीच मीलों पैदल चलकर अंतिम विदाई देना और लोगों के अभिवादन को उतनी ही विनम्रता से स्वीकारना बताता है कि कोई यूं ही तीन दशक तक जनता के दिलों पर राज नहीं करता—यह मुकाम सादगी, मर्यादा और अटूट रिश्तों की नींव पर ही खड़ा होता है।
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