
रिटायर्ड ADG को डिजिटल अरेस्ट कर लपेटा,2.12 करोड़ की ठगी, साइबर पुलिस ने 2 और आरोपियों को पकड़ा !
जयपुर। सेवानिवृत्त ADG स्तर के अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट कर 2.12 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के मामले में राजस्थान पुलिस की सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन टीम ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें अभिषेक और सचिन शामिल हैं। इस मामले में अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ठगी की रकम की मनी ट्रेल और साइबर फ्रॉड से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह के अनुसार जयपुर निवासी सेवानिवृत्त ADG, GSI ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों ने 9 से 18 अगस्त 2026 के बीच मोबाइल फोन और WHATSAPP कॉल के जरिए खुद को पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताया। उन्होंने अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने, गिरफ्तारी वारंट जारी होने और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसने का डर दिखाया। आरोपियों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने, किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने और लाइव लोकेशन चालू रखने के निर्देश दिए। इसके बाद वाटसएप पर फर्जी सरकारी दस्तावेज और गिरफ्तारी वारंट भेजकर बैंक खातों में रकम जमा कराने का दबाव बनाया गया। डर के चलते पीड़ित ने 13 अगस्त को Iaa बैंक के एक खाते में 2.02 करोड़ रुपए और 18 अगस्त को YES BANK के खाते में 10.10 लाख रुपए RTGS के जरिए ट्रांसफर कर दिए। इस तरह कुल 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपए की ठगी हुई। बैंक खाते उपलब्ध कराने से लेकर निकालने रकम तक की भूमिका जांच में सामने आया कि ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचने के बाद आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई। पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट, KYC दस्तावेज, मोबाइल नंबर, CDR, WHATSAPP चैट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अभिषेक ने अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था। उसके खाते में 1.27 लाख रुपए आए। आरोप है कि उसने खाते की जानकारी अन्य आरोपियों को दी और अपना मोबाइल फोन व ATM कार्ड सचिन शर्मा उर्फ चिन्नू को दिया। जांच में उसके खाते से रकम निकाले जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक अभिषेक ने कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की है। वहीं सचिन पर बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले मध्यस्थ के तौर पर काम करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार उसने अभिषेक से बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले कमीशन की बात की और हर्षवर्धन के संपर्क में रहकर खाते की जानकारी उपलब्ध कराई। खाते में रकम आने के बाद सचिन ने ATM से 24 हजार रुपए निकालने की बात सामने आई है। बाकी रकम ई-मित्र के जरिए निकाले जाने की जानकारी जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार सचिन ने कमीशन के लिए बैंक खाते को दूसरे आरोपी को
उपलब्ध कराया था। महाराष्ट्र से पहले गिरफ्तार हो चुके हैं 3 आरोपी
इस मामले में सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की टीम पहले ही महाराष्ट्र से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब अभिषेक और सचिन की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या पांच हो गई है
पुलिस अब वाटसएप रिकॉर्ड, CDR, CAF, IPDR और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की मनी ट्रेल का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि ठगी की रकम आगे किन-किन खातों में पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस की आमजन से अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को NIA, पुलिस, ATS, ED या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाए और वीडियो कॉल पर निगरानी रखते हुए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाए तो उसके झांसे में न आएं। पुलिस के अनुसार सरकारी एजेंसियां वाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को तथाकथित "डिजिटल अरेस्ट" कर रकम ट्रांसफर करने के निर्देश नहीं देती हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय कॉल की सूचना पुलिस को दें और किसी भी दबाव में पैसा ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या CYBERCRIME.GOV.IN पर रिपोर्ट दर्ज कराएं। इसके अलावा राजस्थान पुलिस के साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है।
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