
कलेक्टर कार्यालय का अधिकारी बनकर ANM को धमकाया, खाते से 53 हजार पार
व्हाट्सएप ग्रुप में पहले मिली सूचना का ठगों ने उठाया फायदा, विभागीय जानकारी बताकर जीता भरोसा और फिर कराया लेनदेन
रीवा। साइबर ठग अब सरकारी कर्मचारियों को भी शातिर तरीके से अपने जाल में फंसाने लगे हैं। रीवा में एक एएनएम को कलेक्टर कार्यालय का अधिकारी और तहसीलदार बनकर फोन करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि ठग ने पहले विभागीय जानकारी देकर विश्वास कायम किया, फिर भवन मरम्मत के लिए फंड आने की बात कहकर महिला कर्मचारी को लेनदेन के लिए दबाव में लिया। इसके बाद उसके खाते से करीब 53 हजार रुपये निकल गए।
मामले की शिकायत विश्व मोहिनी नामदेव, एएनएम, द्वारा जिला दंडाधिकारी रीवा को दी गई है। शिकायत के मुताबिक वह रंगोली क्षेत्र में एएनएम के पद पर पदस्थ हैं। उनका मासिक वेतन करीब 25 हजार रुपये है। 8 अगस्त 2026 को ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर एवं मेडिकल ऑफिसर की ओर से व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश दिया गया था कि सभी CHO/ANM को कलेक्टर कार्यालय से अधिकारी अशोक मीणा का फोन आ सकता है। फोन पर अपने-अपने आरोग्य केंद्र की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार उसी दिन दोपहर करीब 3 बजे उसके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। पहली बार कॉल रिसीव नहीं करने के बाद उसे व्हाट्सएप ग्रुप में मिली सूचना याद आई और उसने वापस फोन किया। फोन करने वाले ने खुद को तहसीलदार अशोक मीणा, कलेक्ट्रेट रीवा बताया। उसने कहा कि क्या बीएमओ डॉ. आनंद पांडेय ने फोन के संबंध में जानकारी नहीं दी है। इससे महिला कर्मचारी घबरा गई और उसने बताया कि अधिकारियों ने पहले ही जानकारी दी थी।
इसके बाद कथित व्यक्ति ने बातचीत के दौरान एएनएम के पदस्थापन, सुपरवाइजर रमेश चौधरी, मेडिकल ऑफिसर डॉ. चंद्र प्रताप सहित क्षेत्र में पदस्थ अन्य CHO/ANM की जानकारी तक बताई। शिकायतकर्ता के अनुसार इतनी सटीक जानकारी होने से उसे लगा कि वास्तव में किसी वरिष्ठ अधिकारी का ही फोन है।
भवन मरम्मत के फंड का बनाया बहाना
शिकायत में आरोप है कि कथित अधिकारी ने कहा कि उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन की मरम्मत के लिए फंड आया है और रकम उसके खाते में भेजी जाएगी। इसके बाद उसे सामान खरीदने और संबंधित राशि के लेनदेन के लिए कहा गया। जब एएनएम ने अपनी पदस्थापना और राशि के उपयोग को लेकर सवाल किया तो कथित अधिकारी ने कथित रूप से डांट-फटकार कर दबाव बनाया।
इसके बाद फोन करने वाले ने पहले 20 रुपये उसके फोन-पे पर भेजे और वापस मंगा लिए। इससे उसे कुछ संदेह हुआ, लेकिन लगातार दबाव और खाता बंद करवाने की धमकी के कारण वह घबरा गई। इसके बाद कथित रूप से 34,990 रुपये और फिर 17,990 रुपये के लेनदेन कराए गए।
एक घंटे बाद पता चला खाते से निकल गए 53 हजार
शिकायतकर्ता का कहना है कि फोन कटने के बाद उसे पता चला कि उसके खाते से कुल करीब 53 हजार रुपये की राशि निकल चुकी है। साइबर ठगी की इस घटना से वह आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक रूप से भी परेशान है।
ठगों के पास विभागीय जानकारी पहुंची कैसे?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित साइबर ठगों के पास स्वास्थ्य विभाग की इतनी सटीक जानकारी कैसे पहुंची। ठगों को एएनएम के पदस्थापन से लेकर उनके अधिकारियों और सहकर्मियों के नाम तक की जानकारी थी। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर उन्होंने पीड़िता का विश्वास हासिल किया।
पीड़िता ने जिला दंडाधिकारी से मामले की जांच कराने, साइबर ठगी की राशि वापस दिलाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि ठगी को अंजाम देने वाले कौन हैं और उनके पास विभागीय जानकारी कैसे पहुंची।
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