
#निवास का विकास — सवाल बरकरार, जवाब नदारद....
निवास क्षेत्र के विकास को लेकर क्षेत्रवासियों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। एक ओर जहाँ निवास को #जिला बनाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज होता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र में प्रस्तावित इंडस्ट्री की स्थापना पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसे में सहज ही सवाल उठता है कि आखिर निवास का विकास कब गतिमान होगा?
निवास क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेलता रहा है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव, रोजगार के सीमित अवसर और औद्योगिक निवेश की अनुपस्थिति ने यहाँ के निवासियों को पलायन के लिए विवश किया है। जिला बनाने की मांग केवल प्रशासनिक सुविधा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की पहचान, स्वाभिमान और विकास की गारंटी से जुड़ा भावनात्मक मुद्दा भी है। जब तक क्षेत्र को प्रशासनिक रूप से मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक विकास की गाड़ी पटरी पर नहीं आ सकती।
दूसरी ओर, इंडस्ट्री की स्थापना पर मौजूद सन्नाटा और भी चिंताजनक है। उद्योग ही किसी क्षेत्र के आर्थिक विकास की रीढ़ होते हैं। यदि प्रस्तावित इंडस्ट्री समय पर धरातल पर नहीं उतरेगी, तो न केवल रोजगार के अवसर सीमित रहेंगे, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी पिछड़ेपन का शिकार होती रहेगी। प्रशासन को यह समझना होगा कि घोषणाएँ और आश्वासन केवल कागज़ी न हों, बल्कि उन्हें मूर्त रूप दिया जाए।
निवास के विकास के लिए दोहरी रणनीति की आवश्यकता है — एक ओर जिला बनाने की मांग को गंभीरता से लिया जाए, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों के सामूहिक प्रयास से ही यह संभव हो सकता है।
प्रश्न यह नहीं है कि निवास को विकास की आवश्यकता है या नहीं — प्रश्न यह है कि इच्छाशक्ति कब जागेगी? निवास के लोगों ने लंबा इंतज़ार किया है। अब समय है कि शब्दों से आगे बढ़कर कर्म की भूमिका निभाई जाए। अन्यथा, विकास की आस में टकटकी लगाए यह क्षेत्र और कितने वर्षों तक उपेक्षा का दंश झेलता रहेगा, यह एक बड़ा प्रश्न है — जिसका उत्तर देने का दायित्व प्रशासन और सरकार दोनों का है।
— विशेष टिप्पणी
दिनेश कुमार प्रजापति
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Niwas, Mandla | Sep 12, 2026