
कटरा कालिंजर (जनपद बाँदा) में मोहर्रम के अवसर पर निकला भव्य ताजिया, अकीदत और भाईचारे की दिखी अनूठी मिसाल।
मोहर्रम के पवित्र अवसर पर कटरा कालिंजर में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शहीदाने कर्बला की याद में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ भव्य ताजिया निकाला गया। सफेद रंग की आकर्षक कारीगरी, सुंदर गुंबदों, रंगीन शीशों और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित यह ताजिया सभी के आकर्षण का केंद्र रहा।
जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों, बुज़ुर्गों, युवाओं और बच्चों ने पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ भाग लिया। पूरे मार्ग में "या हुसैन" की सदाएँ गूँजती रहीं और लोगों ने शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की। स्थानीय लोगों ने भी जुलूस का स्वागत कर आपसी प्रेम, सद्भाव और गंगा-जमुनी तहज़ीब का परिचय दिया।
मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, इंसानियत, त्याग और अत्याचार के विरुद्ध डटकर खड़े रहने का संदेश भी देता है। कर्बला की घटना आज भी पूरी दुनिया को यह सिखाती है कि सच्चाई और इंसाफ की राह पर चलने वालों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता।
कटरा कालिंजर की यह ऐतिहासिक परंपरा वर्षों से धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक बनी हुई है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस पवित्र आयोजन में शामिल होकर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हैं तथा उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हैं।
या हुसैन (अ.स.) सलाम शहीदाने कर्बला।
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Banda, Banda | Jun 26, 2026