अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी!
ए. एस. नोमानी का गुस्सा: शिक्षा के नाम पर लूट कब तक?
हर नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही हजारों अभिभावकों को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता है। कई निजी स्कूलों पर आरोप लगते हैं कि वे अभिभावकों को एक तय दुकान से ही महंगी किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। इसके साथ ही प्रवेश शुल्क और अन्य मदों में भी अतिरिक्त खर्च का दबाव महसूस किया जाता है।
बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए. एस. नोमानी ने इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का आर्थिक शोषण स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि कोई स्कूल किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव बनाता है, तो यह अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने मांग की कि:
सभी स्कूलों में फीस और अन्य सभी शुल्कों की पारदर्शी रसीद अनिवार्य हो।
किसी एक दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाए।
गुणवत्तापूर्ण और किफायती किताबें सभी छात्रों को उपलब्ध कराई जाएं।
सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए समान एवं पारदर्शी नियम लागू किए जाएं, ताकि सभी बच्चों को समान अवसर मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि गरीब परिवारों पर बढ़ते शैक्षणिक खर्च का सबसे अधिक असर पड़ता है और शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो हर बच्चे के लिए सुलभ और न्यायसंगत हो।
यदि किसी निजी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित कानूनों के अनुसार उसके विरुद्ध कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक मामले में कार्रवाई संबंधित राज्य के लागू नियमों और सक्षम प्राधिकारी की जांच पर निर्भर करती है।
आपकी राय क्या है?
क्या निजी स्कूलों द्वारा किताबें और यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने की शर्त पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।
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Banda, Banda | Jun 26, 2026