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उप थाना मौजूद, फिर भी 4 जगह अवैध शराब बिक्री के आरोप: आखिर किसकी शह पर चल रहा कारोबार? कुपी पुलिस पर उठे गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री अवैध शराब के खिलाफ सख्त, लेकिन कुपी में कार्रवाई क्यों नहीं? ग्रामीणों का सवाल—क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार है?
छतरपुर। मध्य प्रदेश सरकार जहां अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ सख्ती और कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं छतरपुर जिले के ग्राम पंचायत कुपी से बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आने के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गांव में चार अलग-अलग स्थानों पर अवैध शराब का विक्रय किया जा रहा है।
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि कूपी में उप थाना मौजूद होने के बावजूद यदि खुलेआम अवैध शराब बिकने के आरोप लग रहे हैं, तो जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई आखिर कहां है?
उप थाना है तो निगरानी कहां है?
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में उप थाना संचालित है और वहां प्रभारी के रूप में जगदीश शिवहरे पदस्थ हैं। ऐसे में यदि अवैध शराब बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? और यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
चार जगह बिक्री के आरोप, फिर भी कार्रवाई नहीं—किसकी जिम्मेदारी?
ग्रामीणों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। यदि जांच में गांव में अवैध शराब बिक्री की पुष्टि होती है तो सवाल केवल शराब बेचने वालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि—
• उप थाना क्षेत्र में अवैध कारोबार कैसे पनपा?
• क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं थी?
• शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
• आखिर इस कथित कारोबार पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी किसकी है?
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को तत्काल जांच कर सच्चाई सार्वजनिक करनी चाहिए।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
अवैध शराब केवल कानून तोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह लोगों की जान से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है। देश और प्रदेश में जहरीली शराब से होने वाली घटनाओं के बाद भी यदि स्थानीय स्तर पर शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, तो यह चिंता का विषय है।
ग्रामीण सवाल कर रहे हैं—क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना के बाद जागेगा? क्या कार्रवाई के लिए पहले किसी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है?
एक तरफ मुख्यमंत्री की सख्ती, दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर सवाल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर सक्रिय नजर आते हैं। लेकिन कूपी में अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की मंशा तभी जमीन पर दिखाई देगी, जब स्थानीय स्तर पर भी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
अब जवाब चाहिए...
कूपी के लोगों की मांग है कि पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त रूप से गांव में जांच करें। जिन चार स्थानों पर अवैध शराब बिक्री के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहां जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
अगर आरोप गलत हैं तो पुलिस जांच कर सच्चाई सार्वजनिक करे... और अगर आरोप सही हैं तो फिर सवाल उठना लाजिमी है कि उप थाना होने के बावजूद अवैध शराब का कथित कारोबार आखिर कब से और कैसे चल रहा था?
अब सवाल प्रशासन से—कूपी में अवैध शराब बिक्री के आरोपों पर कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीणों की मांग है—जांच हो, कार्रवाई हो और जिम्मेदारी भी तय हो। क्योंकि सवाल सिर्फ शराब का नहीं, बल्कि कानून के राज और लोगों की सुरक्षा का है।
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