
दिल्ली हाई कोर्ट से AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को राहत नहीं, ₹10 हजार के बॉन्ड मामले में याचिका खारिज
कोर्ट ने SEM को सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने और बॉन्ड की जरूरत की समीक्षा करने का दिया निर्देश
नई दिल्ली। विरोध प्रदर्शन के बाद शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का बॉन्ड भरने के आदेश को चुनौती देने वाली AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। शुक्रवार को अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) को निर्देश दिया कि वह नेहा बोरा को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएं और इस बात की समीक्षा करें कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135 के तहत शुरुआती चरण में ही बॉन्ड भरवाना आवश्यक था या नहीं।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि मजिस्ट्रेट को इस पहलू पर विचार करना होगा कि क्या जांच शुरू होते ही बॉन्ड भरवाने की जरूरत थी या जांच के दौरान सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा सामने आने पर ही ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
मंडी हाउस में सभा के बाद जारी हुआ था नोटिस
यह मामला 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस में आयोजित एक सभा से जुड़ा है, जिसके बाद नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर को उन्हें नोटिस जारी किया था। इसमें BNSS की धारा 126, 130 और 135(3) का उल्लेख किया गया था।
नेहा बोरा को 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने और जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए एक जमानतदार के साथ 10 हजार रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने को कहा गया था।
पुलिस का आरोप है कि नेहा ने नारेबाजी की और निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया। पुलिस ने कनॉट प्लेस में प्रदर्शन करने का आरोप भी लगाया है।
नेहा बोरा ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
नेहा बोरा ने अपनी याचिका में पुलिस के आरोपों को गलत बताया। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि नेहा ने केवल सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण सभा का आह्वान किया था।
उनकी ओर से यह भी कहा गया कि नोटिस में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि सार्वजनिक शांति को तत्काल खतरा था।
याचिका में SEM के रूप में कार्यरत अधिकारी के ACP होने और पुलिस अधिकारियों के निर्देशों के तहत कार्रवाई किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। नेहा की ओर से इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया गया।
दिल्ली पुलिस ने क्या दलील दी?
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए BNSS की धारा 126 और 130 को साथ पढ़ा जाना चाहिए।
पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित समय पर BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। पुलिस का आरोप है कि रोके जाने की कोशिश के बाद नेहा वहां से कनॉट प्लेस की ओर चली गई थीं।
बॉन्ड की आवश्यकता पर समीक्षा के निर्देश
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए भी SEM को मामले के दस्तावेज उपलब्ध कराने और बॉन्ड भरवाने की आवश्यकता पर विचार करने का निर्देश दिया। इस तरह अदालत ने शुरुआती चरण में बॉन्ड की जरूरत और कार्रवाई की प्रक्रिया से जुड़े सवालों की समीक्षा का रास्ता खुला रखा है।
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Chapra, Saran | Oct 23, 2026