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रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुनः आयोजित होने जा रही नीट परीक्षा -जिले में 864 अभ्यर्थियों के लिए चित्रकूट इंटर कॉलेज और राजकीय तुलसी महाविद्यालय बनाए गए हैं परीक्षा केन्द्र चित्रकूट। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली नीट की परीक्षा रद्द होने के बाद कल रविवार को जिले के दो परीक्षा केन्द्रों में पुनः आयोजित होने जा रही है । दोनों परीक्षा केन्द्रों पर 864 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक रविशंकर ने बताया कि शासन द्वारा राजकीय गोस्वामी तुलसीदास महाविद्यालय कर्वी और चित्रकूट इंटर कॉलेज कर्वी को परीक्षा केंद्र बनाया गया है । इस बार केंद्र सरकार और राज्य सरकार बहुत ही सावधानीपूर्वक और सतर्कता के साथ नीट की परीक्षा को सकुशल संपादित कराने के लिए सख्त नियम कानून बनाए हैं । इसी उद्देश्य को लेकर आज परीक्षा संपादन में लगाए गए कक्ष निरीक्षकों की बैठक चित्रकूट इंटर कॉलेज कर्वी में स्टेटिक मजिस्ट्रेट लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता विनोद कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई , जिसमें कक्ष निरीक्षकों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं। स्टेटिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार ने कहा कि यह परीक्षा बहुत ही सतर्कता और निष्पक्षता के साथ संपादित करना है और इसके लिए पूरी सावधानी से एक-एक बिंदु का पालन करना है । केंद्र व्यवस्थापक डॉक्टर रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि तुलसी महाविद्यालय में 432 और चित्रकूट इंटर कॉलेज कर्वी में भी 432 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे । चूंकि एक बार यह परीक्षा रद्द हो चुकी है इसलिए इस बार सरकार कोई भी चूक नहीं करना चाहती। इस बार और भी कडे नियम कानून बनाए गए केंद्र व्यवस्थापक डॉक्टर चौहान ने बताया कि जो नियम कानून और निर्देश अभ्यर्थियों के लिए हैं वही निर्देश कक्ष निरीक्षकों के लिए भी हैं ,कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मोबाइल यहां तक की अपना पैन तक कोई नहीं परीक्षा केंद्र पर लेगा अभ्यार्थियों व कक्ष निरीक्षकों को पेन भी केंद्र के अंदर ही उपलब्ध कराए जाएंगे। परीक्षा केंद्र के अंदर हरकक्ष में जैमर लगा दिए गए हैं ताकि कोई चोरी से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लाने का प्रयास किया भी तो वह डैमेज होगा। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे और वॉइस रिकॉर्डर भी कक्ष में लगाए गए हैं। हर कक्ष में 24 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई है ,हर कक्षा में दो-दो कक्ष निरीक्षक लगाए गए हैं। कक्ष निरीक्षकों को परीक्षा में क्या करना है किस तरह से सावधानी बरतना है सभी नियम कानून बता दिए गए हैं और सतर्कता सजगता के साथ ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं ।परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से 5:15 तक होगी लेकिन कक्ष निरीक्षकों को सुबह 10:00 बजे ही परीक्षा केंद्र में उपस्थित होने को कहा गया है तब तक परीक्षा की तैयारी पूरी होगी अभ्यर्थियों के प्रवेश का समय 11:00 बजे निर्धारित किया गया है और 1:30 बजे तक अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर सकते इसके बाद अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा केंद्र में ही अभ्यर्थियों की विधवा तलाशी होगी, जांच होगी बायोमेट्रिक मशीन से चेहरा और आंखों का मिलान करके ही प्रवेश मिलेगा,कोई डुप्लीकेट या फर्जी अभ्यर्थी परीक्षा नहीं दे पाएगा। बैठक में परीक्षा प्रभारी ऋषि कुमार शुक्ला वीरेंद्र शुक्ला विवेक कुमार तिवारी राम गोपाल दुबे के अलावा सभी कक्ष निरीक्षक मौजूद रहे।

Manikpur, Chitrakoot | Jun 21, 2026

MORE NEWS

🚨 ब्रेकिंग | चित्रकूट 🚨

जनपद चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम कर्वी पहुचे राजापुर  तो वही एसडीएम राजापुर पहुचे कर्वी और संयुक्त अभियान चलाते हुए ओवरलोडिंग एवं संदिग्ध खनन गतिविधियों में लिप्त करीब आधा दर्जन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की।

कार्रवाई के बाद अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। जिले में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन कार्रवाई कर सकता है तो फिर खनिज विभाग और आरटीओ विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करने से क्यों बचते रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल पर पूरी तरह अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आखिर कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य छिपा है या फिर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं?

फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में अवैध खनन माफियाओं की नींद जरूर उड़ा दी है।

🚨 ब्रेकिंग | चित्रकूट 🚨 जनपद चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम कर्वी पहुचे राजापुर तो वही एसडीएम राजापुर पहुचे कर्वी और संयुक्त अभियान चलाते हुए ओवरलोडिंग एवं संदिग्ध खनन गतिविधियों में लिप्त करीब आधा दर्जन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई के बाद अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। जिले में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन कार्रवाई कर सकता है तो फिर खनिज विभाग और आरटीओ विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करने से क्यों बचते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल पर पूरी तरह अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आखिर कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य छिपा है या फिर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं? फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में अवैध खनन माफियाओं की नींद जरूर उड़ा दी है।

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग'

नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है।

नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव

 एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं।

प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! 

​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी
चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर"

​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है।

​ जलधारा का कत्लेआम 

नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है।

चलने लायक नहीं बचीं सड़कें 

​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं।
​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं।

#mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग' नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है। नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं। प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! ​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर" ​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। ​ जलधारा का कत्लेआम नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है। चलने लायक नहीं बचीं सड़कें ​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं। ​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं। #mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026