मल्लावां टैंकर हादसे में दो पुलिसकर्मियों की शिकायत डीजीपी कार्यालय पहुंची, एसपी ने CO को सौंपी जांच
हरदोई। मल्लावां में पानी के टैंकर की चपेट में आकर बाइक सवार के घायल होने के मामले में अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रकरण में सीसीटी टीम प्रभारी श्याम नारायण सिंह और विवेचक उपनिरीक्षक संतोष पासवान की भूमिका को लेकर की गई शिकायत डीजीपी कार्यालय तक पहुंच गई है। शिकायत के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले में आख्या तलब की है।
शिकायतकर्ता सूरज तिवारी ने डीजीपी कार्यालय में शिकायत देकर दोनों पुलिसकर्मियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में घटना की जांच, उपलब्ध तथ्यों और पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर आपत्ति जताई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके पास मामले से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग, वीडियो और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं।
डीजीपी कार्यालय से निर्देश मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए क्षेत्राधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी है। CO से प्रकरण की जांच कर आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है। अब जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका, विवेचना की निष्पक्षता और घटना से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जाएगी।
दस्तावेजों में सामने आया अंतर बना जांच का अहम बिंदु
मामले में सामने आए पुलिस दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के तत्काल बाद पुलिस ग्रुप में प्रसारित संदेश में मोटरसाइकिल सवार के सड़क पर खड़े पानी के टैंकर से टकराने और घायल होने की बात बताई गई थी। वहीं बाद की जनसुनवाई रिपोर्ट में टैंकर को सड़क के किनारे खड़ा बताया गया है।
इसके अलावा शिकायतकर्ता के अनुसार हादसा 10 जुलाई को हुआ था, जबकि जनसुनवाई रिपोर्ट में घटना की तारीख 11 जुलाई 2026 दर्ज होने की बात कही गई है। ऐसे में जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि हादसा वास्तव में किस तारीख को हुआ और दुर्घटना के समय टैंकर किस स्थिति में खड़ा था।
अब CO की जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
डीजीपी कार्यालय तक शिकायत पहुंचने और एसपी द्वारा CO को जांच सौंपे जाने के बाद अब पूरे मामले की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता, पुलिसकर्मियों की भूमिका, विवेचना की प्रक्रिया और दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों की जांच की जाएगी।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या तथ्यात्मक विसंगति सामने आती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है और अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।