हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि किसी सरकारी कर्मचारी की पहली पत्नी की मृत्यु के बाद उसकी दूसरी पत्नी पेंशन पर अपना दावा नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता दमयंती देवी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि कानून की नजर में पहली पत्नी के जीवित रहते रचाया गया दूसरा विवाह पूरी तरह से अमान्य और गैर-कानूनी है।
यह पूरा मामला शिक्षा विभाग में तैनात रहे पूर्व जूनियर बेसिक टीचर खूब राम से जुड़ा है, जो वर्ष 1996 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पहली पत्नी खिमी देवी थीं, जिनसे संतान न होने पर खूब राम ने वर्ष 1970 में दमयंती देवी से दूसरा विवाह कर लिया। वर्ष 2014 में खूब राम के निधन के बाद नियमानुसार उनकी पहली कानूनी पत्नी खिमी देवी को पारिवारिक पेंशन मिलने लगी। हालांकि, जुलाई 2023 में खिमी देवी की भी मृत्यु हो गई, जिसके बाद दूसरी पत्नी दमयंती देवी ने खुद को जीवित विधवा बताते हुए पेंशन और बकाए के भुगतान की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने निर्णय दिया कि पहली शादी के अस्तित्व में रहते हुए किया गया दूसरा विवाह कानूनन कोई संबंध स्थापित नहीं करता। पहली पत्नी के निधन से दूसरा विवाह अपने आप वैध नहीं बन जाता, इसलिए याचिकाकर्ता का पेंशन और बकाया राशि पर कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।