
#ईवीएम_स्ट्रांग_रूम_में_बंद… बाहर शुरू हुआ सत्ता का खेल
#बाड़ाबंदी के बाद बढ़ी सियासी हलचल, भाजपा-कांग्रेस ने बोर्ड बनाने के लिए कसी कमर
बिसाऊ। नगरपालिका चुनाव में मतदान का रण खत्म होते ही अब बिसाऊ की सियासत में चेयरमैन की कुर्सी को लेकर सबसे बड़ा खेल शुरू हो गया है। शुक्रवार को दूसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन मतदान खत्म होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। ईवीएम स्ट्रांग रूम में कैद हैं और बाहर नेता व प्रत्याशी जीत-हार के आंकड़ों के साथ सत्ता का गणित बैठाने में जुट गए हैं।
25 वार्डों में कुल 18,518 मतदाताओं में से 13,756 मतदाताओं ने मतदान किया। कुल मतदान प्रतिशत 74.28 प्रतिशत रहा। अब इन वोटों से निकलने वाला जनादेश बिसाऊ नगरपालिका की अगली सत्ता तय करेगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने समर्थित पार्षदों के आंकड़ों का हिसाब लगाने में जुट गई हैं। कई वार्डों में कांटे की टक्कर के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका किंगमेकर जैसी हो सकती है।
चुनावी नतीजों से पहले ही संभावित विजेताओं को साधने की कवायद शुरू होने की चर्चाएं तेज हैं। कौन किसके साथ है? कौन किसके संपर्क में है? किसके पास कितने पार्षदों का समर्थन है? इन सवालों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। बोर्ड बनाने की दौड़ में एक-एक पार्षद की अहमियत बढ़ गई है। ऐसे में परिणाम आने के बाद तस्वीर तेजी से बदल सकती है।
बिसाऊ नगरपालिका की सत्ता के लिए भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। दोनों खेमे अपने-अपने बोर्ड के दावे कर रहे हैं। लेकिन यदि सीटों का गणित किसी एक दल के पक्ष में साफ नहीं रहा तो निर्दलीय प्रत्याशियों का रुख चेयरमैन की कुर्सी का फैसला कर सकता है।
यानी चुनावी मैदान में भले ही मुकाबला वार्डों में हुआ हो, लेकिन असली सियासी मुकाबला अब बोर्ड के बहुमत और चेयरमैन की कुर्सी पर केंद्रित हो गया है।
ईवीएम स्ट्रांग रूम में सुरक्षित हैं और प्रत्याशियों की नजरें अब मतगणना पर टिकी हैं। किसी को अपनी जीत का भरोसा है तो कोई करीबी मुकाबले के कारण परिणाम को लेकर बेचैन है। चौक-चौराहों, बाजारों और राजनीतिक बैठकों में अब विकास के मुद्दों से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि किसके पास कितने पार्षद आएंगे और चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता कौन बनाएगा।
फिलहाल ईवीएम खामोश हैं… लेकिन बिसाऊ की सियासत बोल रही है!
इन सवालों के जवाब अब मतगणना के दिन सामने आएंगे। बिसाऊ की नगरपालिका में इस बार चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचने की राह जितनी रोमांचक है, उतनी ही पेचीदा भी।
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