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Ashok Soni

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सुबह दरवाजा खुलते ही सामने आया खौफनाक मंजर! 

पत्नी मृत मिली, पति का शव फंदे पर, 

दो बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया !

वार्ड 23 में कमरे के अंदर पलंग पर मृत मिली 28 वर्षीय कौशर, 

पति अब्दुल रहीम रंगरेज का शव फंदे पर मिला 

FSL और MOB टीम ने जुटाए साक्ष्य, 

घरेलू विवाद की आशंका के बीच पुलिस जांच जारी

बिसाऊ। (अशोक सोनी) कस्बे के वार्ड नंबर 23 में बुधवार सुबह एक दम्पति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने से इलाके में सनसनी फैल गई। घर के कमरे में 28 वर्षीय कौशर मृत अवस्था में पलंग पर मिली, जबकि उसके पति अब्दुल रहीम रंगरेज (34) का शव फंदे पर लटका हुआ मिला। प्रारंभिक जांच में पत्नी की हत्या के बाद पति की मौत का मामला सामने आया है। सूचना मिलते ही बिसाऊ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की। पुलिस ने कमरे को सील कर एफएसएल और एमओबी टीम को बुलाया, जिन्होंने मौके से साक्ष्य जुटाए।

सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जगाने पहुंची देवरानी, 
तब हुआ घटना का खुलासा
परिजनों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे अब्दुल रहीम के छोटे भाई की पत्नी बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयार करने के लिए जेठ अब्दुल रहीम और जेठानी कौशर को जगाने उनके कमरे में गई। दरवाजा खटखटाने के बाद भी अंदर से कोई आवाज नहीं आई। इसके बाद दरवाजे के नीचे की ओर लाल रंग जैसा तरल पदार्थ दिखाई देने पर उसने दरवाजे को धक्का दिया, जिससे वह खुल गया। कमरे के अंदर अब्दुल रहीम का शव पंखे से लटका दिखाई दिया, जबकि कौशर पलंग पर मृत अवस्था में पड़ी थी। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और परिजनों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। घटना की जानकारी मिलने पर परिवार में हड़कंप मच गया और आसपास के लोग भी मौके पर एकत्रित हो गए।

15 साल पहले हुई थी शादी, दो बेटे हैं
जानकारी के अनुसार, अब्दुल रहीम रंगरेज की शादी करीब 15 वर्ष पहले फतेहपुर निवासी कौशर से हुई थी। दम्पति के दो बेटे हैं, जिनकी उम्र 14 और 10 वर्ष बताई जा रही है। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। अब्दुल रहीम के पिता अलीम रंगरेज ने बताया कि वह दूसरे मकान में रहते हैं। उन्हें घटना की जानकारी एक निजी स्कूल में ड्यूटी के दौरान फोन के जरिए मिली। उन्होंने कहा कि उन्हें घटना से पहले किसी विवाद या अन्य परिस्थिति की जानकारी नहीं थी।

नींद की दवाइयां और रस्सी मिलने की बात, पुलिस हर पहलू से कर रही जांच
थाना सीआई उमाशंकर शर्मा के अनुसार, बुधवार सुबह थाने पर वार्ड 23 में दम्पति की मौत की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो कमरे में कौशर का शव पलंग पर मिला। प्रारंभिक निरीक्षण में उसके हाथ-पैर रस्सी से बंधे होने और गले पर चोट के निशान होने की बात सामने आई। कमरे में कुछ दवाइयां भी पड़ी मिलीं, जिनकी प्रकृति और उपयोग की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। वहीं, अब्दुल रहीम रंगरेज का शव फंदे पर मिला।

सीआई ने बताया कि प्रथम दृष्टया पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद की आशंका जताई जा रही है, हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। घटनाक्रम रात का होने की आशंका है, जबकि परिजनों को इसकी जानकारी बुधवार सुबह हुई।

एडिशनल एसपी और डिप्टी ने किया मौका मुआयना
घटना की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी देवेंद्र सिंह राजावत और डिप्टी नरेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया तथा परिजनों से जानकारी ली। एफएसएल टीम के विजय भान सांखला और केशव चतुर्वेदी सहित झुंझुनूं की एम ओ बी टीम के एएसआई सतवीर और कांस्टेबल सुमन ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। मृतक कौशर के पीहर पक्ष के परिजन भी मौके पर पहुचे और पुलिस ने जांच के बाद जटिया अस्पताल से मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिया है। 

मौके पर भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष एडवोकेट पवन धोलपुरिया, नगरपालिका चेयरमैन पति एवं पार्षद सलीम सैयद, पूर्व मनोनीत पार्षद अदनान तंवर, पार्षद नदीम सहित अन्य लोग मौजूद रहे। फिलहाल पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और परिजनों के बयानों के आधार पर मामले की जांच में जुटी है। दम्पति की मौत के वास्तविक कारणों और घटनाक्रम की पूरी स्थिति का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

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मेघनाद वध पर गूंजा मैदान

25 फीट के पुतले का दहन, 

चार घंटे तक चला मुखौटों का दंगल; 

माता दुर्गा की संजीव झांकी पर कलेक्टर ने की पुष्प वर्षा, 

ऐतिहासिक मंचन की सराहना

बिसाऊ। (अशोक सोनी) गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज बिसाऊ की ऐतिहासिक मूक रामलीला की अनूठी परंपरा और जीवंत मंचन ने बुधवार को जिला कलेक्टर अरुण गर्ग का भी ध्यान आकर्षित किया। कलेक्टर ने रामलीला मैदान पहुंचकर मंचन देखा और माता दुर्गा की संजीव झांकी पर पुष्प वर्षा की। उन्होंने मूक रामलीला के मंचन को ऐतिहासिक बताया। इस दौरान लक्ष्मण के हाथों मेघनाद वध के प्रसंग ने दर्शकों में जोश भर दिया। जय श्री राम और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच 25 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतले का दहन किया गया।

कलेक्टर का दुपट्टा और प्रतीक चिह्न से किया सम्मान
रामलीला मैदान पहुंचने पर चॉइस इंटरनेशनल प्रा. लि. के एमडी एवं मूक रामलीला ट्रस्टी भामाशाह कमल पोद्दार, संरक्षक जगदीश प्रसाद कसेरा और समिति अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा ने जिला कलेक्टर अरुण गर्ग तथा नायब तहसीलदार सुधेश महला का दुपट्टा ओढ़ाकर और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मान किया। कलेक्टर ने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों को देखा और इस अनूठी सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।

संजीवनी से लौटी लक्ष्मण की चेतना, फिर मेघनाद से महासंग्राम
लीला में रावण के कई योद्धाओं के मारे जाने के बाद लंकापति ने अपने पराक्रमी पुत्र इंद्रजीत मेघनाद को रणभूमि में उतारा। मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध हुआ। मेघनाद के शक्तिशाली प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। भाई की हालत देखकर श्रीराम व्याकुल हो उठे और वानर सेना में मायूसी छा गई। संकट की इस घड़ी में वीर हनुमान संजीवनी बूटी लेकर पहुंचे। वैद्य के उपचार से लक्ष्मण की चेतना लौट आई और सेना में फिर उत्साह का संचार हुआ।

मेघनाद का यज्ञ भंग, लक्ष्मण के बाण से हुआ अंत
लक्ष्मण के स्वस्थ होने की सूचना मिलने पर मेघनाद ने अपनी कुलदेवी के मंदिर में यज्ञ शुरू कर दिया। विभीषण के बताए मार्ग पर हनुमान सहित अन्य योद्धाओं ने यज्ञ भंग कर दिया। इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच निर्णायक युद्ध छिड़ गया। भीषण संग्राम के बाद लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया। पुत्र की मृत्यु से रावण टूट गया और लंका में शोक छा गया। मेघनाद वध के साथ ही रामलीला मैदान जय श्री राम और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। दुधिया रोशनी में नहाए मैदान में आतिशबाजी के बीच 25 फीट के पुतले का दहन आकर्षण का केंद्र रहा।

चार घंटे तक चला मुखौटों का दंगल, जीवंत हुई रामायण
बिसाऊ की मूक रामलीला की विशिष्ट परंपरा के अनुसार खुले रेतीले मैदान में दिन के उजाले में करीब चार घंटे तक मुखौटा धारी कलाकारों ने दंगल में नृत्य और अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया। करीब 50 कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं और अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा। राक्षसों की डरावनी आवाजों और रामायण की चौपाइयों ने पूरे वातावरण को राममय बना दिया। लीला मैदान दर्शकों से खचाखच भरा रहा। स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से आए प्रवासियों ने भी मंचन का आनंद लिया। दर्शक तालियां बजाकर और जय श्रीराम के जयघोष के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाते नजर आए।

समिति पदाधिकारी और गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस दौरान कोषाध्यक्ष प्रीतम दाधीच, मंत्री गोपी किशन दाधीच, विजय माटोलिया, संजय पोद्दार, कमल मिश्रा, त्रिलोकचंद शर्मा, श्रीकिशन स्वामी, भवानीशंकर महनसरीया और भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष एडवोकेट पवन कुमार धोलपुरिया, मुरारी जोशी, विमल सैनी सहित सैकड़ों रामलीला प्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कपिलेश शर्मा और सुभाष खटीक ने किया।

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घर के कमरे में पत्नी मृत मिली, पति का शव भी फंदे पर मिला

सुबह करीब 9 बजे परिजनों को हुई घटना की जानकारी

पुलिस ने कमरा सील कर FSL टीम को बुलाया

बिसाऊ थाना सीआई समेत पुलिस जाब्ता मौके पर

आपसी रंजीश की सामने आ रही है बात

चैयरमेन पति सलीम सैयद सहित काफी लोग मौके पर

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<nis:link nis:type=tag nis:id=ढोल_नगाड़ों_की_गूंज, nis:value=ढोल_नगाड़ों_की_गूंज, nis:enabled=true nis:link/> जयकारों के बीच मां दुर्गा को दी विदाई!

बिसाऊ में धूमधाम से हुआ दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन, नाचते-गाते निकले श्रद्धालु; सुबह हवन-यज्ञ और भंडारे में उमड़े भक्त

बिसाऊ। (अशोक सोनी)शहर में मंगलवार को दशमी तिथि के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। सुबह से ही दुर्गा पंडालों में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चला। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से हवन-यज्ञ कर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की तथा भंडारे में प्रसादी ग्रहण की। वहीं, शाम ढलते ही प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया।

मां दुर्गा को विदाई देने के लिए श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच नाचते-गाते विसर्जन स्थलों की ओर रवाना हुए। माहौल भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए नजर आए।

बाईपास रोड पर जांगिड़ भवन के पास नवयुवक मंडल के तत्वावधान में नवरतन बारी, मुकेश पातुसरिया और संजय सैनी के नेतृत्व में गणगौर कुएं के जलाशय पर प्रतिमा का विसर्जन किया गया। वहीं, बांके बिहारी मंदिर से रामायण प्रचार समिति की ओर से अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में प्रतिमा विसर्जन किया गया। इसके अलावा वार्ड 16 में स्थापित नवदुर्गा प्रतिमाओं का भी विधिवत विसर्जन किया गया।

इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। धार्मिक आयोजनों के समापन के साथ ही शहर में नवरात्र उत्सव का उल्लासपूर्ण समापन हुआ।
इस अवसर पर नवरतन बारी, किरण बारी, डूंगरमल सैनी, विकास पारीक, कमल बजावे वाला, गोकुलेश पुजारी, कमल झुनझुनवाला, हरीश बासोतिया, कमल मिश्रा, विजय कुमार शर्मा, मुरारी लाल शर्मा सहित अन्य महिला पुरुष मौजूद रहे। 
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<nis:link nis:type=tag nis:id=रायमाता_मेले_में_जा_रहे_श्रद्धालुओं_से_भरी_पिकअप_पलटी_25_घायल! nis:value=रायमाता_मेले_में_जा_रहे_श्रद्धालुओं_से_भरी_पिकअप_पलटी_25_घायल! nis:enabled=true nis:link/>

निराधनू के धर्मा होटल के पास मोड़ पर बेकाबू होकर पलटी गाड़ी, 

मौके पर मची चीख-पुकार; 15 घायलों को बिसाऊ अस्पताल लाया गया, 

गंभीर घायलों को चूरू किया रेफर

बिसाऊ। (अशोक सोनी) गांगियासर स्थित राय माता धाम में दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं की खुशियां उस वक्त चीख-पुकार में बदल गईं, जब श्रद्धालुओं से भरी एक पिकअप निराधनू गांव में धर्मा होटल के पास मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में महिला, पुरुष और बच्चों सहित करीब 25 लोग घायल हो गए। अचानक हुए हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और राहगीर मदद के लिए दौड़े। स्थानीय युवकों ने तत्परता दिखाते हुए निजी वाहनों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। बिसाऊ के जटिया अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल लोगों को एंबुलेंस से चूरू रेफर किया गया।

युवकों ने दिखाई मानवता, निजी वाहनों से पहुंचाया अस्पताल
हादसे के बाद निराधनू निवासी धर्मवीर सिंह सहित सुनील मीणा, महेंद्र मीणा, कृष्ण कुमावत, नरेश और मुकेश चारण ने मानवता की मिसाल पेश की। इन युवकों ने बिना देर किए निजी वाहनों की मदद से 14-15 घायलों को बिसाऊ के जटिया अस्पताल पहुंचाया। वहीं, अन्य घायलों को मलसीसर, झुंझुनूं और चूरू के अस्पतालों में ले जाया गया। सूचना मिलते ही बिसाऊ पुलिस भी मौके पर पहुंची और राहत कार्यों में जुट गई।

जटिया अस्पताल में प्राथमिक उपचार, चूरू रेफर किए घायल
बिसाऊ के जटिया अस्पताल में डॉ. दीपक गर्ग, जयपाल धायल, सविता, हृदयवीर, महेंद्र और संतोष ने घायलों का प्राथमिक उपचार किया। अस्पताल के डॉ. दीपक गर्ग ने बताया कि मंगलवार दोपहर करीब 14-15 मरीज अस्पताल पहुंचे। सभी को प्राथमिक उपचार दिया गया। कुछ घायलों की स्थिति गंभीर होने तथा अन्य के हाथ-पैर और कमर में चोट लगने व फ्रैक्चर की आशंका के चलते उन्हें बेहतर उपचार के लिए चूरू रेफर किया गया। चिकित्सक के अनुसार, इनमें पांच लोग गंभीर रूप से घायल थे। इस दौरान थाना एसआई सुभाष चंद्र सहित रामसिंह, श्रवण कुमार, मुकेश कुमार और महेंद्र सिंह भी राहत कार्यों में जुटे रहे।
हादसे में ये हुए घायल 
कौशल्या देवी (37) सरजीत (19) आशा कंवर (43) रिशब (14) राधिका (14) तारामणी (65) नवजीत (22) ललित (20) यशपाल (19) संजू (39) सोनू (40) सुमन (40) सहित अन्य घायल हुए। 

सामने से वाहन आने पर बिगड़ा संतुलन, मोड़ पर पलटी पिकअप
प्रत्यक्षदर्शी धर्मवीर ने बताया कि निराधनू में पावर हाउस के पास मोड़ पर सामने से एक वाहन आने के दौरान साइड देने की स्थिति बनी। इसी दौरान पिकअप का संतुलन बिगड़ गया और गाड़ी पलट गई। धर्मवीर के अनुसार, पिकअप में महिला, पुरुष और बच्चों सहित करीब 20 से 25 लोग सवार थे। हादसे में कई लोगों को चोटें आईं, जबकि कुछ यात्रियों को कोई चोट नहीं आई।

मेले की खुशियां मातम में बदलीं, घायलों ने सुनाई आपबीती
हादसे में घायल 14 वर्षीय राधिका ने बताया कि वह अपनी मौसी और भाई के साथ राय माता मेले में जा रही थी। इसी दौरान हादसा हो गया, जिसमें उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया।

वहीं, कौशल्या देवी ने बताया कि वह अपने परिवार के पांच सदस्यों के साथ राय माता के दर्शन करने जा रही थीं। रास्ते में सामने से वाहन आने पर साइड देने के दौरान पिकअप हादसे का शिकार हो गई। उन्होंने बताया कि पिकअप में जाट, मीणा, राजपूत और नाई समाज के महिला-पुरुषों व बच्चों सहित करीब 20 से 25 लोग सवार थे। उनके परिवार के पांच सदस्य भी हादसे में घायल हुए हैं।

हादसे में करीब 80 वर्षीय तारामणी और 45 वर्षीय सुमन मीणा के सुरक्षित रहने की जानकारी भी सामने आई है। राय माता मेले में दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं के साथ हुए इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में स्थानीय युवकों की तत्परता और मानवता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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<nis:link nis:type=tag nis:id=कुंभकरण_का_अंत_अब_रावण_की_बारी nis:value=कुंभकरण_का_अंत_अब_रावण_की_बारी nis:enabled=true nis:link/> ! 25 फीट के कुंभकर्ण पुतले का दहन

5 साल के नन्हे कलाकार से 85 वर्ष के बुजुर्ग तक निभा रहे किरदार, विश्वविख्यात मूक रामलीला में रावण वध का बेसब्री से इंतजार

बिसाऊ। (अशोक सोनी) अधर्म का अहंकार चूर हुआ, भाई की सीख भी रावण को सही राह पर नहीं ला सकी और आखिरकार भगवान श्रीराम के बाणों ने महाबली कुंभकर्ण का अंत कर दिया। मंगलवार को बिसाऊ की विश्वविख्यात ऐतिहासिक मूक रामलीला में जैसे ही कुंभकरण वध का दृश्य मंचित हुआ, पूरा रामलीला मैदान ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा। 25 फीट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले का दहन हुआ तो आसमान में उठती लपटों के बीच दर्शकों की निगाहें अब अगले बड़े प्रसंग रावण वध पर टिक गईं। यहां संवाद नहीं, बल्कि कलाकारों की भाव, सजीव अभिनय और युद्ध के दृश्यों की भव्यता ही पूरी कथा बयां करती है। यही बिसाऊ की मूक रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता है, जिसमें 5 वर्ष के नन्हे बच्चे से लेकर 85 वर्ष के बुजुर्ग तक अपनी कला से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर रहे हैं।

भाई की नसीहत भी नहीं पिघला सकी रावण का अहंकार
मंगलवार की लीला में राम की वानर सेना ने लंका को घेर कर युद्ध का ऐलान किया। रावण ने पहले मेघनाथ को रणभूमि में भेजा, जिसने लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर आए और लक्ष्मण के स्वस्थ होने के बाद युद्ध फिर शुरू हुआ। जब रावण के सामने संकट गहराने लगा तो मंत्रियों ने उसे अपने भाई कुंभकरण को जगा कर युद्ध में भेजने की सलाह दी।

कुंभकर्ण को जगाने के लिए नगाड़े बजाए गए, हाथी और बैंड-बाजे तक लगाए गए, लेकिन गहरी नींद में सोया कुंभकर्ण नहीं जागा। आखिरकार गरमा-गरम पकवानों और सुगंधित भोजन की महक ने उसकी नींद तोड़ी। जागने के बाद कुंभकर्ण ने जब रावण से युद्ध का कारण पूछा तो उसे राम-लक्ष्मण के पराक्रम और लंका पर चढ़ाई की पूरी जानकारी दी गई।

कुंभकर्ण ने अपने भाई को समझाया कि श्रीराम कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि स्वयं नारायण के अवतार हैं और माता सीता दिव्य शक्ति का स्वरूप हैं। उसने रावण को सीता को सम्मान पूर्वक लौटाकर श्रीराम की शरण में जाने की सलाह दी। लेकिन सत्ता, अहंकार और प्रतिशोध में अंधे रावण ने भाई की बात मानने के बजाय उसे वापस सो जाने को कह दिया। भाई के अपमान और युद्ध की चुनौती के बीच कुंभकर्ण रणभूमि में उतर पड़ा।

इसके बाद राम और कुंभकर्ण के बीच भीषण युद्ध का मंचन हुआ। अंततः श्री राम के बाणों ने महाकाय कुंभकरण का अंत कर दिया। वध के दृश्य के साथ ही जयकारे गूंज उठे और 25 फीट के पुतले का दहन किया गया। अब दर्शकों को उस निर्णायक घड़ी का इंतजार है, जब श्रीराम के हाथों रावण का अहंकार भी धराशायी होगा।

भामाशाहों ने खोला सहयोग का खजाना, रामलीला को दिए 1.51 लाख रुपये
मूक रामलीला के मंच पर मंगलवार को अतिथि दीर्घा में युवा उद्योगपति एवं चॉइस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के एमडी तथा मूक रामलीला के भामाशाह-संरक्षक कमल पोद्दार, युवा उद्योगपति एवं भामाशाह-संरक्षक रामप्रकाश बिरमीवाला और गोगामेड़ी के महंत रविनाथ मौजूद रहे। रामलीला समिति के संरक्षक जगदीश प्रसाद कसेरा, अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा और मंत्री गोपी किशन पारीक ने अतिथियों को दुपट्टा पहनाकर तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान कमल पोद्दार ने रामलीला समिति को 1 लाख रुपये और रामप्रकाश बिरमी वाला ने 51 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग प्रदान किया। दोनों भामाशाहों की ओर से कुल 1 लाख 51 हजार रुपये का सहयोग ऐतिहासिक मूक रामलीला की परंपरा को संबल देने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।

कमल पोद्दार, युवा उद्योगपति एवं भामाशाह-संरक्षक
“बिसाऊ की ऐतिहासिक मूक रामलीला हमारी सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक है। इतने वर्षों से कलाकार बिना संवाद बोले केवल भाव-भंगिमाओं के माध्यम से रामायण का सजीव मंचन कर रहे हैं, यह अपने आप में अद्भुत है। इस परंपरा को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। रामलीला समिति के प्रयास सराहनीय हैं और हमारा प्रयास रहेगा कि इस ऐतिहासिक आयोजन को निरंतर सहयोग मिलता रहे।”

रामप्रकाश बिरमीवाला, युवा उद्योगपति एवं भामाशाह-संरक्षक
“बिसाऊ की मूक रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ियों से जुड़ी आस्था, संस्कृति और पहचान है। यहां छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कलाकार जिस समर्पण से अभिनय करते हैं, वह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। ऐसी विरासत को बचाए रखना और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सबका दायित्व है। समिति के साथ समाज का सहयोग बना रहना चाहिए।”

महंत रविनाथ, गोगामेड़ी
“भगवान श्रीराम की लीला हमें सत्य, धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कुंभकर्ण का प्रसंग बताता है कि सत्य का ज्ञान होने के बावजूद अहंकार और गलत पक्ष का साथ विनाश की ओर ले जाता है। बिसाऊ की मूक रामलीला में कलाकार जिस भाव और निष्ठा से प्रसंगों को प्रस्तुत करते हैं, वह सराहनीय है। इस परंपरा को सहेजना और धर्म-संस्कृति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।”

पूर्व मंत्री श्यामसुंदर शर्मा और पूर्व अध्यक्ष सुनील शास्त्री के निर्देशन में लीला का मंचन हुआ। कार्यक्रम का संचालन कपिलेश शर्मा और सुभाष खटिक ने किया। दर्शक दीर्घा में संजय पोद्दार, मुरारी जोशी, विजय माटोलिया, प्रमोद आर्य, भवानीशंकर महनसरिया सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक और रामलीला प्रेमी मौजूद रहे।

अब निगाहें रावण वध पर
कुंभकर्ण के वध के साथ रामलीला का युद्ध प्रसंग निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। एक ओर श्रीराम की सेना विजय की ओर बढ़ रही है, तो दूसरी ओर रावण का अहंकार अब भी उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बना हुआ है। बिसाऊ के दर्शक अब उस ऐतिहासिक दृश्य की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जब धर्म और अधर्म के महासंग्राम का अंतिम फैसला होगा और श्री राम के बाणों से रावण का अंत होगा।
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पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने करीब से जानी बिसाऊ की ऐतिहासिक विरासत

विश्वविख्यात मूक रामलीला की परंपरा और बारीकियों से रूबरू हुए विद्यार्थी

बिसाऊ की ऐतिहासिक हवेलियों और अंतिम पुराने दरवाजे के संरक्षण की उठी मांग

गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज मूक रामलीला ने विद्यार्थियों को किया प्रभावित

विरासत बचाने के लिए युवाओं की भागीदारी जरूरी, संरक्षण पर दिया जोर

रामलीला कमेटी ने पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों का प्रतीक चिह्न देकर किया सम्मान

पर्यटन विशेषज्ञ राजेश शर्मा के साथ बिसाऊ की धरोहर देखने पहुंचा विद्यार्थियों का दल

मूक रामलीला में इस्तेमाल होने वाले पुतलों के निर्माण की पारंपरिक कला देखी

मूक रामलीला में कुंभकर्ण, मेघनाद, नरान्तक और रावण के पुतले बनकर तैयार

बिसाऊ की मूक रामलीला में मंगलवार को होगा कुंभकर्ण के पुतले का दहन

22 से 28 फीट तक ऊंचे पुतले तैयार, रामलीला में दिखेगा अनूठा परंपरागत अंदाज

साल 2002 से पुतले बना रहे कारीगर मनोज भानीपुरा वाला ने साझा किए अनुभव

कुंभकर्ण का 23, मेघनाद का 25 और नरान्तक का 22 फीट ऊंचा पुतला तैयार

28 फीट ऊंचे रावण के पुतले का मूक रामलीला के 14वें दिन होगा दहन

देशभर में दशहरे पर जलता है रावण, बिसाऊ में 14वें दिन निभाई जाती है अनूठी परंपरा

बिसाऊ की ऐतिहासिक विरासत पर संकट, संरक्षण के ठोस प्रयासों की दरकार

पीढ़ियों से चली आ रही पुतले बनाने की कला आज भी निभा रही परंपरा को जीवंत

हवेलियां, ऐतिहासिक दरवाजा और मूक रामलीला बिसाऊ की सांस्कृतिक पहचान

‘भाव बुलेटिन’ पत्रिका की टीम का सम्मान, युवाओं तक पहुंचेगी राजस्थान की संस्कृति

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गांगियासर राय माता मेले में उमड़ा 30 हजार श्रद्धालुओं का हुजूम

प्राकृतिक स्टेडियम में कुश्ती-कबड्डी का महासंग्राम; 

महिला पहलवानों ने भी दिखाए दांव-पेंच, 

हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बना गांगियासर का मेला

बिसाऊ। (अशोक सोनी) शेखावाटी में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की अनूठी पहचान रखने वाले गांगियासर राय माता के तीन दिवसीय मेले में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को घंटों कतारों में खड़े रहना पड़ा। अष्टमी और नवमी के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्र के साथ प्रवासी श्रद्धालुओं सहित करीब 30 हजार भक्तों ने मां राय के दरबार में धोक लगाई और मनोकामना पूर्ण होने की मन्नत मांगी। 48 घंटे तक छह फुट लंबी अखंड ज्योत और अगरबत्ती प्रज्वलित कर श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था प्रकट की। दूसरी ओर, मेले के अनोखे प्राकृतिक स्टेडियम में कुश्ती और कबड्डी के मुकाबलों ने रोमांच की नई इबारत लिखी। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान के पहलवानों ने ओपन अखाड़े में दमखम दिखाया, जिसे देखने के लिए हजारों दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी।

आस्था की कतारें, अखाड़े में ताकत का प्रदर्शन
मां राय के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मेले में धार्मिक आस्था के साथ ग्रामीण संस्कृति और खेल परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। राय माता प्रबंध समिति के अध्यक्ष लादूराम बढ़सर ने बताया कि परंपरागत रूप से मेला दो दिन का रहता है, लेकिन तीसरे दिन भी गांव की महिलाएं मेले में लगी दुकानों से खरीदारी करने पहुंचती हैं। इसी वजह से मेले की रौनक एक दिन और बनी रहती है।

समिति सदस्य मैनपाल सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए मुरारीलाल तिवाड़ी, बनवारीलाल जांगिड़ और अविनाश महला कोदेसर की ओर से भंडारे की व्यवस्था की गई। मंदिर में रविवार रात भजन संध्या का आयोजन हुआ, वहीं मंदिर के पीछे स्थित द्वारका प्रसाद ओपन अखाड़े में कुश्ती दंगल ने दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।

कबड्डी में बाडेट का दबदबा, 15 हजार का प्रथम पुरस्कार
मेले में आयोजित दो दिवसीय कबड्डी प्रतियोगिता में आठ टीमों ने भाग लिया। कड़े मुकाबलों के बाद बाडेट की टीम ने विजेता बनने का गौरव हासिल किया, जबकि भूतिया बास की टीम उपविजेता रही। भामू का बास तीसरे और कोदेसर की टीम चौथे स्थान पर रही।

डॉ. राजेश बाबल की ओर से विजेता टीम को 15 हजार, उपविजेता को 11 हजार तथा तीसरे और चौथे स्थान पर रही टीमों को 5,100-5,100 रुपये नकद पुरस्कार दिए गए। प्रतियोगिता में बेस्ट कैचर और बेस्ट रेडर को भी 1,100-1,100 रुपये देकर सम्मानित किया गया।

अखाड़े में 20 पहलवानों ने दिखाए दांव-पेंच
कुश्ती प्रतियोगिता में 15 पुरुष और पांच महिला पहलवानों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग मुकाबलों में पहलवानों ने अपनी ताकत, फुर्ती और कुश्ती कौशल का प्रदर्शन किया। मैनपाल सिंह शेखावत के अनुसार, पहली नंबर की कुश्ती में तीन पहलवानों के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें अन्नी महेंद्रगढ़ और छगन बगड़ संयुक्त विजेता रहे। दोनों को 20-20 हजार रुपये नकद और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

दूसरे नंबर की कुश्ती में छह पहलवानों ने जोर आजमाइश की। इसमें टाई के विजय विजेता और जय भगवान महेंद्रगढ़ उपविजेता रहे। विजेता को 11 हजार और उपविजेता को 3,100 रुपये नकद पुरस्कार के साथ मोमेंटो प्रदान किया गया।

तीसरे नंबर की कुश्ती में वैभव ढाका, ढाका का बास विजेता तथा कानाराम सरदारशहर उपविजेता रहे। दोनों को क्रमशः 5,100 और 1,100 रुपये नकद पुरस्कार व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

महिला पहलवानों ने भी अखाड़े में दिखाया दम
महिला कुश्ती में पांच महिला पहलवानों ने भाग लिया। मुकाबले में मोनिका विजेता और तृप्ति उपविजेता रहीं। आयोजकों के अनुसार, दोनों को क्रमशः 1,100 और 500 रुपये नकद पुरस्कार तथा मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। पुरुष पहलवानों को आकाश कुलहरि बीदासर, प्यारेलाल ढूकिया और हाजी अब्दुल कय्यूम की ओर से नकद पुरस्कार दिए गए। वहीं, महिला पहलवानों को गांगियासर निवासी एवं सिंलोग प्रवासी सुशीला देवी ने पुरस्कार राशि प्रदान कर प्रोत्साहित किया।

चप्पे-चप्पे पर पुलिस, समिति रही मुस्तैद
मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कानून व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए पुलिस जाब्ता तैनात रहा। बिसाऊ थानाधिकारी उमाशंकर शर्मा, एसआई इंद्राज सिंह सहित धधूरी, मलसीसर और बगड़ थानों के पुलिसकर्मियों तथा झुंझुनूं महिला थाना, पुलिस लाईन और यातायात पुलिस के जवानों ने व्यवस्था संभाली। राय माता प्रबंध समिति के पदाधिकारी और सदस्य भी मेले के सफल आयोजन तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर मुस्तैद रहे।

गांगियासर का यह मेला एक बार फिर साबित कर गया कि यहां आस्था केवल मंदिर की चौखट तक सीमित नहीं, बल्कि भाईचारे, लोक परंपराओं और खेल संस्कृति के रूप में भी जीवंत है। मां राय के दरबार में श्रद्धा का सैलाब और प्राकृतिक स्टेडियम में पहलवानों का दमखम मेले का मुख्य आकर्षण रहा।
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संजीवनी के लिए पर्वत ही उठा लाए बजरंगबली!

रामलीला मैदान में गूंजा लक्ष्मण शक्ति प्रसंग, 

भाई की हालत देख भावुक हुए श्री राम; 

हनुमान-भरत मिलन ने बांधा समां, अब युद्ध भूमि में उतरेगा कुंभकर्ण

बिसाऊ। (अशोक सोनी) शहर के मुख्य बाजार स्थित रामलीला मैदान में आयोजित विश्वविख्यात ऐतिहासिक मूक रामलीला में सोमवार को लक्ष्मण शक्ति की लीला का भावपूर्ण और रोमांचक मंचन हुआ। मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध, शक्ति बाण से लक्ष्मण का मूर्छित होना और भाई की दशा देखकर श्री राम का विलाप इन दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, संजीवनी बूटी की तलाश में हनुमानजी का पूरा पर्वत उठा लाने का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा।

लीला के दौरान युद्धभूमि में मेघनाथ ने लक्ष्मण पर शक्तिबाण का प्रयोग किया, जिससे लक्ष्मण मूर्छित होकर गिर पड़े। भाई को अचेत देखकर श्रीराम व्याकुल हो उठे। पूरे रामदल में चिंता छा गई। संकट की इस घड़ी में हनुमानजी लंका से सुषेण वैद्य को भवन सहित उठाकर रामदल में ले आए। सुषेण वैद्य ने लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए हिमालय से संजीवनी बूटी लाने का उपाय बताया।

कालनेमि का अंत कर संजीवनी की तलाश में पहुंचे हनुमान
सुषेण वैद्य की सलाह मिलते ही हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने हिमालय की ओर रवाना हुए। रास्ते में कालनेमि राक्षस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन हनुमानजी ने उसका वध कर दिया। समय कम था और सूर्योदय से पहले संजीवनी पहुंचाना जरूरी था। बूटी की पहचान नहीं होने पर हनुमान जी पूरा पर्वत ही उठा लाए। उनकी इस अद्भुत लीला ने दर्शकों में उत्साह भर दिया।

भरत के बाण से रुके हनुमान, फिर हुआ भावपूर्ण संवाद
पर्वत लेकर आकाश मार्ग से अयोध्या के ऊपर से गुजर रहे हनुमान जी को देखकर भरत जी ने उन्हें शत्रु समझकर बाण चला दिया। इसके बाद हनुमान जी और भरत जी के बीच संवाद का प्रसंग सामने आया। परिचय स्पष्ट होने पर स्थिति समझ में आई और हनुमानजी संजीवनी लेकर रामदल पहुंच गए। सुषेण वैद्य ने संजीवनी का प्रयोग किया तो लक्ष्मणजी की मूर्छा दूर हो गई। लक्ष्मण के होश में आते ही रामदल में खुशी की लहर दौड़ गई और संकट के बादल छंटते नजर आए।

लंका में मचा हड़कंप, रावण ने कुंभकर्ण को जगाने की तैयारी की
इधर, युद्ध में लगातार चुनौती का सामना कर रहे रावण ने अब अपने बलशाली भाई कुंभकर्ण को समय से पहले जगाकर युद्धभूमि में उतारने की तैयारी शुरू कर दी। लक्ष्मण शक्ति प्रसंग के बाद कहानी एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अब दर्शकों की निगाहें कुंभकर्ण के युद्ध में उतरने और राम-रावण युद्ध के अगले रोमांचक घटनाक्रम पर टिकी हैं।

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<nis:link nis:type=tag nis:id=दुर्गा nis:value=दुर्गा nis:enabled=true nis:link/> पूजा महोत्सव बिसाऊ 
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नवयुवक मंडल बिसाऊ के तत्वाधान मे महा आरती <nis:link nis:type=tag nis:id=live nis:value=live nis:enabled=true nis:link/> 
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रावण की हठ के आगे विभीषण की नीति और अंगद की समझाइश बेअसर 

बिसाऊ। (अशोक सोनी) कस्बे की विश्वविख्यात ऐतिहासिक मूक रामलीला में रविवार को धर्म, नीति, भाईचारे और अहंकार के टकराव के मार्मिक दृश्य साकार हुए। खुले मैदान में मंचित लीला में विभीषण का प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचना, समुद्र पर सेतु निर्माण, अंगद-रावण संवाद और राम-रावण की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध का मंचन किया गया। बिना संवादों के केवल भाव के माध्यम से कलाकारों ने प्रसंगों को जीवंत कर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

भाई को समझाया, लेकिन अहंकार में अंधे रावण ने लात मारकर निकाला
लीला के दौरान रावण के दरबार में श्री राम और लक्ष्मण को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी बीच विभीषण ने अपने भाई रावण को नीति का मार्ग दिखाते हुए माता सीता को सम्मान पूर्वक श्री राम के पास लौटाने की सलाह दी। लेकिन सद्बुद्धि की बात रावण को नागवार गुजरी। क्रोध में अंधे रावण ने विभीषण को लात मारकर लंका से बाहर निकाल दिया। अपमानित और दुखी विभीषण ने अधर्म का साथ छोड़कर प्रभु श्रीराम की शरण ग्रहण की। इस प्रसंग ने संदेश दिया कि जब सत्ता और अहंकार विवेक पर हावी हो जाते हैं, तब विनाश का मार्ग खुलने लगता है।

समुद्र पर सेतु बना, लंका पहुंची वानर सेना
इसके बाद समुद्र पार करने के लिए श्रीराम की प्रार्थना और समुद्र देव के प्रकट होने की लीला का मंचन हुआ। समुद्र देव ने नल-नील की सहायता से सेतु निर्माण का मार्ग बताया। नल-नील के सहयोग से समुद्र पर सेतु बनाया गया और श्रीराम के नेतृत्व में वानर सेना लंका की ओर बढ़ी। सेतु निर्माण के दृश्य ने रामभक्तों को रोमांचित किया।

अंगद ने दी समझाइश, रावण ने ठुकराया शांति का प्रस्ताव
युद्ध से पहले श्रीराम ने अंगद को दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजा। अंगद ने रावण को समझाते हुए माता सीता को लौटाकर युद्ध टालने का अवसर दिया, लेकिन रावण अपनी जिद पर अड़ा रहा। समझाइश और शांति का प्रस्ताव ठुकराते ही संघर्ष टालने की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई। इसके बाद राम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध शुरू हो गया। रणभूमि में वानर सेना और राक्षस सेना के बीच संघर्ष के दृश्यों ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। युद्ध में रावण की सेना के योद्धा मारे जाने लगे, तो रावण का पुत्र मेघनाद युद्ध के मैदान में उतर आया। इसी रोमांचक मोड़ पर गुरुवार की लीला को विश्राम दिया गया।

लीला का मंचन आचार्य सुनील शास्त्री व पूर्व मंत्री श्याम सुंदर भानी पुरा के र्निदेशन हुआ जबकि मंच संचालन कपिलेश शर्मा और सुभाष खटीक ने किया।
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हवेलियों और अंतिम बचे दरवाजे के संरक्षण की जरूरत पर दिया जोर, रामलीला कमेटी ने किया सम्मान

बिसाऊ। (अशोक सोनी) गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज बिसाऊ की विश्वविख्यात 15 दिवसीय ऐतिहासिक मूक रामलीला देश-दुनिया में अपनी पहचान रखती है, लेकिन इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी है? इसी सवाल के बीच रविवार को जयपुर की पूर्णिमा यूनिवर्सिटी से विद्यार्थियों का एक दल बिसाऊ पहुंचा। विद्यार्थियों ने यहां की ऐतिहासिक हवेलियों, अंतिम बचे पुराने दरवाजे, रामलीला के पुतले बनाने की पारंपरिक कला और मूक रामलीला के मंचन को करीब से देखा। इस दौरान विरासत के संरक्षण और युवाओं को इससे जोड़ने की जरूरत प्रमुखता से सामने आई।

हवेलियां और ऐतिहासिक दरवाजा संरक्षण की राह देख रहे
महनसर निवासी पर्यटन गाइड एवं विशेषज्ञ राजेश शर्मा के साथ पहुंचे विद्यार्थियों ने बिसाऊ की ऐतिहासिक हवेलियों और कस्बे में बचे अंतिम पुराने दरवाजे को देखा। विद्यार्थियों ने इन धरोहरों के महत्व को समझते हुए इनके संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता पर जोर दिया। ऐतिहासिक इमारतें किसी शहर की पहचान और उसके गौरवशाली अतीत की गवाह होती हैं, लेकिन समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं हुए तो यह विरासत केवल तस्वीरों और किस्सों तक सिमट सकती है। ऐसे में संबंधित विभागों और जिम्मेदारों के लिए इन धरोहरों की सुध लेना जरूरी है।

पुतले बनाने की कला देख अभिभूत हुए विद्यार्थी
विद्यार्थियों ने मूक रामलीला में इस्तेमाल होने वाले पुतलों को तैयार करने की पारंपरिक प्रक्रिया भी देखी। इस दौरान उन्होंने कारीगर परिवार की मेहनत, हुनर और पीढ़ियों से चले आ रहे समर्पण को करीब से समझा। इसके बाद विद्यार्थियों ने खुले मैदान में मूक रामलीला का मंचन देखा और इस अनूठी परंपरा की विशेषताओं को जाना। विद्यार्थियों ने विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उनका मानना रहा कि ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी से जोड़ना संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

कमेटी ने प्रतीक चिन्ह देकर किया सम्मान
रामलीला कमेटी की ओर से अध्यक्ष राजेन्द्र मिश्रा, भामाशाह जगदीश प्रसाद कसेरा, कोषाध्यक्ष प्रीतम दाधीच ने पूर्णिमा यूनिवर्सिटी की एचओडी आलिया, निमांशा, पायल सैनी, रिक्शन इवान सहित विद्यार्थियों के दल का प्रतीक चिह्न देकर सम्मान किया गया। वहीं, शेखावाटी में पर्यटन के क्षेत्र में प्रयासों के लिए पर्यटन विशेषज्ञ राजेश शर्मा का भी सम्मान किया गया। राजस्थान की 
संस्कृति और विरासत को युवाओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘भाव बुलेटिन’ के लिए आलिया और उनकी टीम को सम्मानित किया गया। इस पहल को सांस्कृतिक विरासत और युवा पीढ़ी के बीच संवाद मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

अब सवाल संरक्षण के ठोस प्रयासों का है। बिसाऊ की ऐतिहासिक हवेलियां, पुराना दरवाजा और पीढ़ियों से चली आ रही मूक रामलीला केवल स्थानीय पहचान नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर हैं। विद्यार्थियों का यहां पहुंचना इस विरासत के महत्व को सामने लाता है, लेकिन इसके दीर्घकालीन संरक्षण के लिए संबंधित विभागों, स्थानीय प्रशासन और समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

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<nis:link nis:type=tag nis:id=live nis:value=live nis:enabled=true nis:link/> बिसाऊ नव युवक मंडल दुर्गा पूजा महोत्सव 2026
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दुर्गा पूजा महोत्सव बिसाऊ <nis:link nis:type=tag nis:id=live nis:value=live nis:enabled=true nis:link/>
डॉ. बलवंत सीगड़ का पशु चिकित्सा अधिकारी पद पर चयन, सरस्वती लाइब्रेरी में किया सम्मान

बिसाऊ। (अशोक सोनी) धीरासर निवासी कमलेश सीगड़ के पुत्र डॉ. बलवंत सीगड़ का पशु चिकित्सा अधिकारी पद पर चयन होने पर क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस उपलब्धि पर बिसाऊ स्थित सरस्वती लाइब्रेरी के सदस्यों ने डॉ. बलवंत सीगड़ का सम्मान कर हर्ष व्यक्त किया। सदस्यों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उनकी इस सफलता को मेहनत, लगन और समर्पण का परिणाम बताते हुए सदस्यों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। इस अवसर पर मास्टर संदीप, कुलदीप, सुनील शर्मा, अनील कुमार सहित काफी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित रहे। 
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पलभर में धू-धू कर जलकर राख

अशोक वाटिका में मचाया उत्पात, अक्षय कुमार का वध कर मेघनाद से भिड़े बजरंगबली; 300 फीट के दंगल में उमड़ा जनसैलाब, मूक अभिनय ने बांधा समां

बिसाऊ। (अशोक सोनी) शहर की विश्वविख्यात, गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित ऐतिहासिक मूक रामलीला में शनिवार देर शाम भक्ति, शौर्य और रोमांच का ऐसा संगम देखने को मिला कि लीला प्रेमी भाव-विभोर हो उठे। दूधिया रोशनी से जगमगाते करीब 300 फीट के दंगल में हनुमानजी के लंका प्रवेश, अशोक वाटिका में उत्पात, अक्षय कुमार वध और लंका दहन का सजीव मंचन किया गया। आसमान में गूंजती आतिशबाजी और दर्शकों के जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा माहौल राममय हो गया।

रामलीला प्रबंध समिति के पूर्व अध्यक्ष सुनील शास्त्री और पूर्व मंत्री श्याम सुंदर भानीपुरा के निर्देशन में कलाकारों ने बिना संवाद बोले केवल हाव-भाव, अभिनय और शारीरिक मुद्राओं के जरिए प्रसंगों को जीवंत किया। मूक रामलीला की यही खासियत दर्शकों को लगातार आकर्षित करती रही।

सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, रावण की सभा तक पहुंचा पराक्रम
माता सीता की खोज करते हुए हनुमानजी लंका पहुंचे और अशोक वाटिका में उन्हें प्रभु श्रीराम की निशानी देकर विश्वास दिलाया। इसके बाद वाटिका में फल खाने और पेड़-पौधों को उखाड़ने के दृश्य का मंचन हुआ। रावण के सैनिकों ने हनुमानजी को पकड़कर उसके दरबार में पेश किया। रावण ने दंड स्वरूप उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया, लेकिन यही आदेश सोने की लंका के विनाश का कारण बन गया। पूंछ में आग लगते ही हनुमानजी ने लंका के विभिन्न हिस्सों में आग लगाने का दृश्य प्रस्तुत किया। लंका दहन के दौरान हुई भव्य आतिशबाजी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। कलाकारों के अभिनय के बीच-बीच में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।

आयोजन की भव्यता के बीच व्यवस्था और परंपरा भी चर्चा में
रामलीला का विशाल मैदान दर्शकों से खचाखच भरा रहा। आयोजन की भव्यता, रोशनी और आतिशबाजी ने माहौल को आकर्षक बनाया। वहीं, बिना संवाद के इतने बड़े प्रसंगों को मंच पर उतारना कलाकारों के अभ्यास और समन्वय की परीक्षा भी रहा। मूक रामलीला की वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने में कलाकारों और आयोजन समिति की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

इस अवसर पर रामलीला प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा, कोषाध्यक्ष प्रीतम दाधीच, मंत्री गोपी किशन दाधीच, संरक्षक एवं भामाशाह जगदीश प्रसाद कसेरा, विजय माटोलिया, संजय पोद्दार, कमल मिश्रा, त्रिलोकचंद शर्मा, ओमप्रकाश दाधीच, राजेश जलधारी, अरविंद सोनी, रिद्धकरण सोनी, मनीष सोनी और कंपाउंडर अमीर सिंह, रामगोपाल लाटा, श्री किशन स्वामी, नवरतन बारी, भवानीशंकर महनसरीया सहित सैकड़ों लीला प्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कपिलेश शर्मा और सुभाष खटीक ने किया। लीला के समापन पर लकी ड्रॉ के कूपन खोले गए और पुरस्कारों की घोषणा के बाद पुरस्कार वितरण किया गया। वहीं, सुभाष बॉस ने अंग्रेज का स्वांग रचा और नकली धारियों के कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया।

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