
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग तेज, क्रमिक अनशन के 15वें दिन महिलाओं ने संभाला मोर्चा
पहाड़ी आर्मी की जिलाध्यक्ष प्रेमा मेर अनशन पर बैठीं, बोलीं- राज्य आंदोलन में महिलाओं ने दी थी बड़ी कुर्बानी, लेकिन आज भी अधूरे हैं पहाड़ के सपने
हल्द्वानी। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क, तिकोनिया में चल रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन रविवार को 15वें दिन भी जारी रहा। 18 अक्टूबर से चल रहे इस आंदोलन में अब महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी है। रविवार को पहाड़ी आर्मी की जिलाध्यक्ष प्रेमा मेर ने क्रमिक अनशन पर बैठकर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठाई।
राज्य आंदोलन में महिलाओं की कुर्बानी को किया याद
अनशन पर बैठीं प्रेमा मेर ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। महिलाओं ने आंदोलन के दौरान लाठियां और गोलियां खाईं तथा अनेक कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान लोगों का सपना था कि अलग राज्य बनने के बाद पहाड़ के लोगों को उनके अधिकार मिलेंगे, पलायन रुकेगा और महिलाएं सुरक्षित रहेंगी। लेकिन आज भी पहाड़ के सामने कई गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को राज्य आंदोलनकारियों के सपनों से जुड़ा मुद्दा बताया।
विभिन्न जिलों से आंदोलन में पहुंच रहे लोग
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि अब तक टिहरी के अनिल बहुगुणा, चखुटिया के भुवन कठायत, गोचर के रमेश थपलियाल, रुद्रप्रयाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर दयाल सिंह राणा, मासी के आनंद राम, चमोली के दुर्गा प्रसाद, ऋषिकेश के रामेश्वर शर्मा, गैरसैंण के नारायण सिंह बिष्ट, कर्णप्रयाग के दान सिंह मिगवाल, दिल्ली से जगदीश ममगई और एडवोकेट भुवन चंद्र तथा पिथौरागढ़ के कविन्द्र चंद सहित कई आंदोलनकारी क्रमिक अनशन पर बैठ चुके हैं। उन्होंने बताया कि अगले दिन तारा दत्त पांडेय क्रमिक अनशन पर बैठेंगे।
प्रवासियों का भी मिल रहा समर्थन
विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोग लगातार बुद्ध पार्क पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। दूसरे राज्यों में रह रहे उत्तराखंड के प्रवासी भी इस अभियान से जुड़ने के लिए हल्द्वानी पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
पहाड़ के अस्तित्व और अस्मिता से जुड़ा है गैरसैंण का सवाल
आंदोलन को समर्थन दे रहे पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण पहाड़ के अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से हुआ था। राज्य गठन के वर्षों बाद भी स्थायी राजधानी का सवाल अधूरा है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के खेत, किसान, गांव और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग महत्वपूर्ण है। राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के सपनों को पूरा करने की दिशा में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
78 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी भी आंदोलन में डटे
आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे समाजसेवी संतोष नेगी ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से लोग हल्द्वानी पहुंचकर आंदोलन में भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि पहाड़ की पहचान, पलायन, रोजगार और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास जैसे मुद्दों पर सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
वहीं, 78 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमोड़ी भी नंदप्रयाग से हल्द्वानी पहुंचे हैं। वह पिछले कई दिनों से बुद्ध पार्क में लगे टेंट में ही 24 घंटे रहकर आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे हैं।
बड़ी संख्या में आंदोलनकारी रहे मौजूद
इस दौरान पहाड़ी आर्मी के जिलाध्यक्ष फौजी राजेंद्र कांडपाल, प्रेमा मेर, नीमा भट्ट, मनोज रावत, जय रावत, अंजू पांडे, विनोद नेगी, संजय जोशी, संजय बिष्ट, कविता जीना, देवेंद्र सालाकोट, तारा पांडेय, रजत पाटनी, दीपा आर्य, मुन्नी देवी, सीमा देवी, ललिता देवी, लता देवी, हिमानी पांडे, ज्योत्सना पांडे, उषा शर्मा, गजेंद्र नाथ, आनंद राम, शुभम जोशी और दीपक जोशी सहित सैकड़ों आंदोलनकारी मौजूद रहे।
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