जहां कभी चरखे और करघों की आवाज गूंजती थी, आज वही गांधी कुटीर संरक्षण का इंतजार कर रहा है।
सारण के दिघवारा प्रखंड स्थित मलखाचक का गांधी कुटीर स्वतंत्रता आंदोलन, खादी और स्वदेशी की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा है। स्थानीय इतिहास में यहां करीब 400 करघों के संचालन का उल्लेख मिलता है। महात्मा गांधी से जुड़ी स्मृतियों के साथ मलखाचक में क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े प्रसंग भी मिलते हैं।
1950 में गांधीजी की स्मृति को जीवित रखने के उद्देश्य से बने गांधी कुटीर की मौजूदा स्थिति अब संरक्षण और जीर्णोद्धार की जरूरत की ओर ध्यान खींचती है।
गांधी जयंती पर साल में एक दिन माल्यार्पण से आगे बढ़कर क्या इस ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने की पहल होगी?
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Chapra, Saran | Oct 2, 2026