मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले में राज्य सरकार समेत 8 पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले में दायर जनहित याचिका के मुताबिक, 2020 से 28 जनवरी 2026 तक मध्य प्रदेश में 2,74,311 महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं। याचिका में दावा किया गया है कि यह संख्या औसतन करीब 130 महिलाओं के रोजाना लापता होने के बराबर है।
याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत पांडे की ओर से अधिवक्ता शुभम मांडल ने कोर्ट के सामने यह मुद्दा उठाया। याचिका में आरोप है कि महिलाओं और बच्चों के लापता होने से जुड़े अपडेट सरकारी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं।
याचिका के अनुसार, लापता लोगों की संख्या, तलाश अभियान, बरामदगी और अब तक लंबित मामलों की जानकारी के लिए आरटीआई के जरिए भी जानकारी मांगी गई थी। जिला अपराध अभिलेख ब्यूरो, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो और राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो से आंकड़े मांगे गए, लेकिन याचिकाकर्ता के मुताबिक अपेक्षित जानकारी नहीं मिल सकी।
जनहित याचिका में लापता महिलाओं और बच्चों के पूरे आंकड़े सार्वजनिक करने, तलाश एवं बरामदगी की जानकारी नियमित रूप से जारी करने और मामले की निगरानी के लिए एक समिति गठित करने की मांग की गई है। अब हाईकोर्ट के नोटिस के बाद सरकार और अन्य पक्षों को अपना जवाब देना होगा।
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