
पांगी का दर्द दिखाई देता है तो भरमौर का दर्द कब दिखाई देगा?
भरमौर की जनता का सवाल—पांगी पर फोकस ठीक, लेकिन अपनी पंचायतों की सुध कब लेंगे नेता?
भरमौर/चंबा। पांगी घाटी की समस्याओं को लेकर राजनीतिक नेताओं की सक्रियता के बीच अब भरमौर की जनता ने भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सवाल किसी क्षेत्र को कम या ज्यादा महत्व देने का नहीं, बल्कि भरमौर और पांगी—दोनों क्षेत्रों के साथ समान प्राथमिकता और जवाबदेही का है।
🟠 भाजपा — पांगी का दर्द दिखाई दे रहा है, भरमौर का क्यों नहीं?
राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार सहित भाजपा नेताओं की पांगी को लेकर सक्रियता के बीच भरमौर के लोग पूछ रहे हैं कि अगर पांगी की समस्याएं नेताओं को दिखाई दे रही हैं, तो भरमौर की पंचायतों की समस्याओं पर उतनी ही गंभीरता कब दिखाई जाएगी?
भरमौर पंचायत समिति की बैठक में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए जा चुके हैं।
जनता का सवाल:
👉 क्या भरमौर की सभी पंचायतों में सड़कें बेहतर हैं?
👉 क्या हर स्कूल में पर्याप्त शिक्षक और जरूरी सुविधाएं हैं?
👉 क्या स्वास्थ्य सेवाएं लोगों की जरूरत के मुताबिक उपलब्ध हैं?
👉 क्या मरीजों को इलाज के लिए आज भी लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती?
🔵 कांग्रेस — सत्ता में रहते हुए भरमौर की समस्याओं का जवाब कौन देगा?
भरमौर की जनता का सवाल कांग्रेस से भी है। यदि क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और बिजली जैसे मुद्दे आज भी उठ रहे हैं, तो पिछले वर्षों में सत्ता में रही सरकारों से इन समस्याओं का हिसाब कौन मांगेगा?
हालिया समीक्षा बैठकों में भी भरमौर क्षेत्र में विकास योजनाओं के साथ सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और बिजली जैसे विषयों की समीक्षा की गई है।
जनता पूछ रही है:
👉 वर्षों से आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीन पर बदलाव कितना आया?
👉 जिन पंचायतों में आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वहां जिम्मेदारी किसकी है?
👉 क्या केवल बैठकें और घोषणाएं पर्याप्त हैं?
🟠 भाजपा — विधायक जी, अपनी पंचायतों की भी सुध लीजिए
भरमौर में वर्तमान विधायक डॉ. जनक राज हैं और पंचायत समिति में भाजपा समर्थित सदस्यों को बहुमत मिला है।
ऐसे में जनता का सवाल सीधा है—
“विधायक जी, पांगी के साथ-साथ भरमौर की पंचायतों का भी दौरा कीजिए। लोगों के बीच बैठकर पूछिए कि उनकी सबसे बड़ी समस्या क्या है।”
सड़क टूट रही है तो देखिए।
स्कूल में शिक्षक की कमी है तो देखिए।
स्वास्थ्य केंद्र में सुविधा कम है तो देखिए।
मरीज को अस्पताल पहुंचने में परेशानी है तो देखिए।
🔵 कांग्रेस और 🟠 भाजपा — सवाल दोनों से
यह मुद्दा केवल भाजपा या कांग्रेस के पक्ष-विपक्ष का नहीं है।
भरमौर की जनता का सवाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से है।
पांगी को विकास चाहिए—बिल्कुल चाहिए।
लेकिन भरमौर को भी विकास चाहिए।
पांगी की सड़क चाहिए—भरमौर की सड़क भी चाहिए।
पांगी में स्वास्थ्य सुविधा चाहिए—भरमौर में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा चाहिए।
पांगी में स्कूलों की व्यवस्था मजबूत हो—भरमौर के स्कूल भी मजबूत हों।
👉सबसे बड़ा सवाल
क्या पांगी से ज्यादा विकसित हो गया है भरमौर?
अगर हां, तो जनता को बताया जाए कि किन क्षेत्रों में भरमौर आगे है।
और अगर भरमौर में अभी भी समस्याएं हैं, तो फिर सवाल यह है—
“पांगी का दर्द नेताओं को दिखाई दे रहा है, भरमौर का दर्द कब दिखाई देगा?”
भरमौर की जनता पांगी के विकास के खिलाफ नहीं है।
जनता सिर्फ इतना चाहती है कि भरमौर की समस्याओं को भी उतनी ही गंभीरता से सुना जाए।
क्योंकि दोनों क्षेत्र इसी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं और दोनों के लोगों को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और बेहतर कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधाओं का समान अधिकार है।
✍️ सुरेंद्र ठाकुर
PANGI LIVE NEWS | डिजिटल अख़बार
“सवाल किसी के खिलाफ नहीं—सवाल जवाबदेही का है।”
Chamba, Chamba | Sep 29, 2026