
बृजनगर:पंचायत चुनाव में टिकटों के बंटवारे से पहले ही कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है। टिकट के दावेदारों के बायोडाटा जुटाने और चुनावी रणनीति बनाने के लिए बैठकों का दौर जारी है, लेकिन इसी बीच बृजनगर में सीकरी चुंगी स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में हुई बैठक के दौरान ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने कांग्रेस की सियासत को गरमा दिया। कांग्रेस महिला जिला अध्यक्ष एडवोकेट श्वेता यादव के बैठक से नाराज होकर बाहर निकलने के मामले ने पार्टी के भीतर महिलाओं के सम्मान, संगठन में उनकी भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला जिलाध्यक्ष ने बैठक में बैठने से रोकने और बाहर जाने के लिए कहने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे बैठक की व्यवस्था से जुड़ा मामला बताया।
महिला जिलाध्यक्ष का सवाल—महिलाओं को टिकट देने की बात, तो उनकी राय और सम्मान क्यों नहीं?
बैठक में विवाद उस समय सामने आया, जब कांग्रेस महिला जिला अध्यक्ष एडवोकेट श्वेता यादव ने आरोप लगाया कि वह कोर कमेटी की बैठक में शामिल होने पहुंची थीं, लेकिन उन्हें बैठक में बैठने नहीं दिया गया और बाहर जाने के लिए कहा गया। श्वेता यादव का कहना है कि वह लंबे समय से जमीनी स्तर पर कांग्रेस के लिए काम कर रही हैं और महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष हैं। इसके बावजूद बैठक में उनके साथ ऐसा व्यवहार होना उन्हें अपमानजनक लगा।श्वेता यादव ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पंचायत चुनाव में महिलाओं को टिकट देने और उनके लिए महत्वपूर्ण सीटों की बात हो रही है, तो महिलाओं की राय और उनके सम्मान का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि उन्होंने पार्टी के खिलाफ कोई गलत काम किया है, तो उन्हें लिखित में बताया जाए। वह इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं। इस घटनाक्रम के बाद श्वेता यादव नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गईं।
जिलाध्यक्ष की सफाई—गोपनीय चर्चा के लिए बनाई थी व्यवस्था
दूसरी ओर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजीव चौधरी ने श्वेता यादव के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि किसी को व्यक्तिगत रूप से अपमानित करने या बैठक से बाहर निकालने का मामला नहीं था। उनके अनुसार पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश से तीन प्रभारी आए थे। बैठक में कांग्रेस के विभिन्न प्रकोष्ठों और अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद थे। राजीव चौधरी ने बताया कि प्रदेश प्रभारियों की मंशा संभावित उम्मीदवारों से व्यक्तिगत बातचीत कर उनकी दावेदारी और राय जानने की थी। इसके साथ ही चुनावी रणनीति और गोपनीय विषयों पर चर्चा की जानी थी। इसी कारण कमरे में केवल प्रभारियों और जिला अध्यक्ष के रहने की व्यवस्था की गई तथा अन्य लोगों से बाहर जाने के लिए कहा गया। उनके मुताबिक इसी व्यवस्था को लेकर महिला जिलाध्यक्ष नाराज हो गईं और विवाद की स्थिति बन गई। उन्होंने पूरे मामले को छोटी-सी बात बताते हुए किसी को अपमानित करने से इनकार किया।
टिकटों पर मंथन के बीच संगठन की अंदरूनी खींचतान उजागर
पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस में संभावित उम्मीदवारों की दावेदारी पर मंथन चल रहा है। ऐसे समय में महिला जिलाध्यक्ष और जिला अध्यक्ष के बीच सामने आए इस विवाद ने संगठन की अंदरूनी स्थिति को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ महिला जिलाध्यक्ष ने सम्मान और भागीदारी का सवाल उठाया है, तो दूसरी तरफ जिला अध्यक्ष ने बैठक की गोपनीयता और व्यवस्था को विवाद की वजह बताया है। अब सवाल यह है कि पंचायत चुनाव में महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने की बात करने वाली कांग्रेस अपने ही संगठन में महिला पदाधिकारियों की भूमिका और सम्मान को लेकर उठे सवालों का समाधान कैसे करेगी? फिलहाल बृजनगर की ब्राह्मण धर्मशाला में हुई बैठक का यह घटनाक्रम कांग्रेस की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।