
नालंदा सिपाही हत्याकांड: प्रेम त्रिकोण, सरकारी राइफल से फायरिंग और साजिश के आरोपों ने बढ़ाई गुत्थी
नालंदा | विशेष रिपोर्ट
The silence media news
नालंदा में उत्पाद विभाग की विशेष जांच इकाई (EIB) के सिपाही अजीत कुमार की गोली लगने से हुई मौत का मामला अब कई गंभीर आरोपों और नए दावों के कारण चर्चा में है। मामले में प्रेम संबंधों में तनाव, कथित साजिश, सरकारी राइफल छीने जाने और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की जांच में वारदात से जुड़े कई पहलुओं को खंगाला जा रहा है। हालांकि, प्रेम त्रिकोण को हत्या की वजह बताए जाने सहित कई दावे अभी जांच के दायरे में हैं और उन्हें अदालत या पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बिना अंतिम सच नहीं माना जा सकता।
मीडिया रिपोर्ट में नालंदा पुलिस के एक कर्मी के हवाले से दावा किया गया है कि इस मामले में आरोपी दरोगा पुष्पा कुमारी, सिपाही अजीत कुमार और बाल सुधार गृह में तैनात कांस्टेबल रिशु के बीच संबंधों की भूमिका की जांच की जा रही है। इसी दावे के अनुसार, अजीत और पुष्पा के बीच पहले से नजदीकी थी, लेकिन अजीत के पटना स्थानांतरित होने के बाद पुष्पा और रिशु के बीच भी संबंध बढ़ने की बात सामने आई है।
इस घटनाक्रम ने जांच के सामने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर अजीत और पुष्पा के बीच संबंधों की शुरुआत कब हुई? रिशु की भूमिका इस पूरे मामले में कैसे सामने आई? घटना वाले दिन उसकी ड्यूटी कहां थी और वह उत्पाद विभाग की टीम के साथ किस परिस्थिति में मौजूद था? इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
छह साल पहले हुई थी अजीत की शादी, तीन साल से पुष्पा से नजदीकी का दावा
उपलब्ध विवरण के अनुसार, नालंदा जिले के नगरनौसा निवासी अजीत कुमार की शादी करीब छह साल पहले हुई थी। बताया जाता है कि उन्होंने आरा की रहने वाली युवती से प्रेम विवाह किया था। शादी के लगभग तीन साल बाद ड्यूटी के दौरान उनकी मुलाकात दरोगा पुष्पा कुमारी से हुई और धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अजीत और पुष्पा के बीच करीब तीन साल से प्रेम संबंध थे। अजीत की शादी को लेकर दोनों के बीच तनाव और विवाद होने की बात भी कही गई है। हालांकि, इन निजी संबंधों और विवादों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
अजीत की तैनाती पहले नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में थी। बाद में उनका स्थानांतरण पटना स्थित उत्पाद विभाग की विशेष जांच इकाई में हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अजीत के पटना जाने के बाद पुष्पा और बाल सुधार गृह में तैनात कांस्टेबल रिशु के बीच नजदीकियां बढ़ने का दावा किया गया है।
यह भी कहा गया है कि रिशु पहले से ही पुष्पा के संपर्क में था, जब वह हिलसा अनुमंडल में पदस्थापित थीं। पुलिस इस कथित संबंध और घटनाक्रम के बीच किसी संभावित कड़ी की जांच कर रही है या नहीं, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
घटना वाले दिन क्या हुआ था? जांच में सामने आए ये अहम सवाल
इस हत्याकांड में सबसे महत्वपूर्ण पहलू वारदात वाले दिन की घटनाओं का क्रम है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अजीत कुमार को शराब तस्करों की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर पुष्पा कुमारी को फोन किया और खराट मोड़ के पास पहुंचने के लिए कहा।
बताया गया है कि शराब तस्करी में इस्तेमाल की जा रही पिकअप वैन आगे चल रही थी। उसके पीछे काले रंग की स्कॉर्पियो में अजीत कुमार अपने एक साथी और चालक के साथ उसका पीछा कर रहे थे। सूचना मिलने के बाद पुष्पा कुमारी भी एक अन्य स्कॉर्पियो से मौके पर पहुंचीं। उनके साथ कांस्टेबल रिशु और चार होमगार्ड जवानों के रहने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट में घटनास्थल पर वाहनों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सबसे आगे कथित तौर पर शराब तस्करों की पिकअप वैन थी। उसके पीछे अजीत कुमार की स्कॉर्पियो चल रही थी, जबकि पुष्पा की गाड़ी पीछे थी।
इसी दौरान फायरिंग की घटना हुई, जिसमें अजीत कुमार को गोली लग गई। उन्हें पहले पावापुरी स्थित अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटना के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
होमगार्ड की राइफल छीने जाने का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर दावा सरकारी राइफल से गोली चलाए जाने को लेकर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुष्पा कुमारी ने कथित तौर पर होमगार्ड जवान दीनानाथ को फायरिंग करने का निर्देश दिया था। दावा है कि दीनानाथ ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद कांस्टेबल रिशु ने उनसे सरकारी राइफल ले ली और लगातार पांच राउंड फायरिंग की।
इसी फायरिंग के दौरान एक गोली अजीत कुमार को लगने की बात कही गई है। हालांकि, फायरिंग की वास्तविक परिस्थितियों, गोली चलाने वाले व्यक्ति और कथित आदेश की पुष्टि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि यदि कांस्टेबल रिशु की ड्यूटी उस दिन बाल सुधार गृह में निर्धारित थी, तो वह उत्पाद विभाग की टीम के साथ मौके पर किस आधार पर मौजूद था? क्या उसे किसी अधिकारी ने विशेष रूप से बुलाया था? क्या वह आधिकारिक ड्यूटी पर था या किसी अन्य परिस्थिति में टीम के साथ गया था?
इन सवालों का जवाब मिलने से घटनास्थल पर मौजूद लोगों की भूमिका और वारदात से पहले की गतिविधियों को समझने में मदद मिल सकती है।
पुष्पा कुमारी की पिछली तैनाती और विवादों के आरोप भी चर्चा में
अजीत कुमार की मौत के मामले के बीच पुष्पा कुमारी की पूर्व तैनाती के दौरान लगे कथित आरोप भी चर्चा में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2023 से फरवरी 2026 के बीच हिलसा अनुमंडल में उनकी पदस्थापना के दौरान छापेमारी और विभागीय कार्यशैली को लेकर विवाद होने के आरोप लगाए गए थे।
इन आरोपों में निजी व्यक्तियों को छापेमारी टीम में शामिल करने, अवैध वसूली और शराबबंदी कानून के तहत कार्रवाई के दौरान अनियमितताओं जैसी बातें शामिल हैं। हालांकि, इन आरोपों को पुष्ट तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले संबंधित शिकायतों, विभागीय अभिलेखों और जांच के निष्कर्षों की पुष्टि जरूरी है।
शरीफाबाद में छापेमारी के दौरान हुआ था विवाद
रिपोर्ट में फरवरी 2024 में इस्लामपुर थाना क्षेत्र के शरीफाबाद में हुई एक छापेमारी का भी उल्लेख है। दावा किया गया है कि इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और उत्पाद विभाग की टीम के बीच विवाद बढ़ गया था। इसके बाद कथित तौर पर पथराव हुआ, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए और सरकारी वाहन को नुकसान पहुंचा।
रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर उत्पाद विभाग की टीम को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी थी। इस घटना को लेकर लगाए गए आरोपों और कार्रवाई के वास्तविक विवरण की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड तथा विभागीय दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
अवैध वसूली और निजी संपत्ति को लेकर भी आरोप
पुष्पा कुमारी की हिलसा में तैनाती के दौरान शराब कारोबारियों से कथित तौर पर नियमित रकम वसूलने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा, शराब पीने के आरोप में पकड़े गए लोगों को वाहन में घुमाने और उनके परिजनों से कथित रूप से 3,000 से 3,500 रुपये लेकर छोड़ने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट में अवैध कमाई से निजी रिसॉर्ट खड़ा करने के आरोप का भी जिक्र है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में किसी प्रमाणित जांच रिपोर्ट, विभागीय कार्रवाई या न्यायिक निष्कर्ष का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
यदि इन शिकायतों की औपचारिक जांच होती है, तो संबंधित अवधि के विभागीय रिकॉर्ड, छापेमारी से जुड़े दस्तावेज, शिकायतकर्ताओं के बयान और संपत्ति से संबंधित अभिलेख महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
पुलिस ने क्या कहा? पिकअप वैन बरामद, आरोपियों की तलाश जारी
नालंदा के पुलिस अधीक्षक हृदयकांत के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ने मामले का खुलासा करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वारदात में इस्तेमाल की गई पिकअप वैन बरामद कर ली गई है और उसे लाने वाले मुख्य आरोपियों की पहचान भी कर ली गई है।
पुलिस के अनुसार, मामले में शामिल अन्य लोगों तथा फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
जांच में वारदात के दौरान इस्तेमाल किए गए वाहन, हथियार की भूमिका, घटनास्थल पर मौजूद लोगों की गतिविधियों और आरोपियों के बीच संभावित संपर्कों की कड़ियां जोड़ना महत्वपूर्ण होगा। पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्ष ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।
जांच के सामने हैं कई बड़े सवाल
अजीत कुमार की मौत का मामला केवल फायरिंग की घटना तक सीमित नहीं है। इसमें घटनास्थल पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका, सरकारी हथियार के इस्तेमाल की परिस्थितियों और शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की कार्यप्रणाली की भी पड़ताल जरूरी है।
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