
"सूर्य पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है और पृथ्वी पर पैदा होने वाला एक छोटा सा और मामूली सा बंदा भगवान सूर्य को कैसे निगल सकता है? यह अज्ञानता है और इसी अज्ञानता को खत्म करने के लिए लोग पढ़ाई करते हैं।"
— स्वामी प्रसाद मौर्य (पूर्व मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार)
स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बहुत गहरी और वैज्ञानिक सोच वाली बात कही है।
हम इंसान खुद को कितना बड़ा और महत्वपूर्ण समझ बैठते हैं, लेकिन सृष्टि के सामने हम कितने छोटे हैं। सूर्य जैसी अनंत शक्ति के सामने हमारी छोटी-छोटी अहंकारी सोच कितनी बेकार है।
**मनुवाद** की सोच वाले लोग आज भी जाति-पाति के नाम पर खुद को "विशेष" समझते हैं, लेकिन सृष्टि के नियम के आगे ये सब कुछ छोटा पड़ जाता है।
शिक्षा का असली मकसद भी यही है — अंधकार और अहंकार को मिटाना, ताकि हम सच्चाई को समझ सकें और विश्वास के साथ जी सकें।
यह बयान हमें सिखाता है कि घमंड छोड़कर विनम्रता से जीना चाहिए।
आप क्या सोचते हैं?
क्या शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य अहंकार और अंधकार मिटाना है?
Comment में अपनी राय जरूर बताएं 👇
#SwamiPrasadMaurya #Surya #Education #Gyan #Vigyan #Manuvad #kbnindianews