
रेवाड़ी में नगर परिषद के दावों की खुली पोल, बेसहारा गोवंश ने ली दो लोगों की जान * कैप्टन अजय सिंह यादव
रेवाड़ी। रेवाड़ी शहर में बेसहारा गोवंश की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। पिछले महज सात दिनों में गोवंश की चपेट में आने से दो लोगों की मौत की घटनाएं सामने आना बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। शहर के पॉश सेक्टर-4 में 80 वर्षीय सेवानिवृत्त कैप्टन जगराम पर गोवंश ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल जगराम ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, दूसरे मामले में माता चौक पर भी सुबह-सुबह गोवंश की टक्कर से एक बुजुर्ग की जान चली गई।
इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि रेवाड़ी में बेसहारा गोवंश के आतंक ने नगर परिषद और भाजपा सरकार के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। चेहरे बदल गए, लेकिन सड़ी-गली व्यवस्था आज भी जस की तस है।
कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने की बातें करती रही है।लेकिन रेवाड़ी की सड़कों का हाल इन दावों की जमीनी हकीकत साफ बता रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर हरियाणा और रेवाड़ी में व्यवस्था इतनी बेहतर है तो फिर सड़कों पर खुलेआम घूम रहे सैकड़ों गोवंश आखिर किस बात का सबूत हैं? शहर की लगभग हर प्रमुख सड़क, बाजार और रिहायशी क्षेत्र में गोवंश का जमावड़ा देखा जा सकता है। इससे राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों की जान लगातार खतरे में है।
कैप्टन यादव ने कहा कि यह केवल आवारा पशुओं की समस्या नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी और सुरक्षा का सवाल है। कई लोग पहले भी बेसहारा पशुओं की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। अब सात दिन के भीतर दो लोगों की मौत के बाद भी अगर नगर परिषद और प्रशासन नहीं जागता, तो इससे बड़ी विफलता और क्या होगी?
उन्होंने सवाल किया कि नगर परिषद द्वारा गोवंश पकड़ने के लिए टेंडर और व्यवस्थाएं किए जाने के बावजूद आखिर सड़कों पर पशुओं की संख्या कम क्यों नहीं हो रही? इस काम के लिए जारी होने वाला पैसा कहां खर्च हो रहा है? कितने पशु पकड़े गए, कितने गौशालाओं में भेजे गए और इस पूरी व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है?
कैप्टन अजय सिंह यादव ने आरोप लगाया कि रेवाड़ी नगर परिषद लंबे समय से भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोपों से घिरी रही है। चुनाव के दौरान भी कांग्रेस ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और आज भी वही सवाल खड़े हैं। यदि पशुओं को पकड़ने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए पैसा और टेंडर दोनों हैं, तो फिर धरातल पर काम दिखाई क्यों नहीं देता?
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता चुनावों के समय गाय को ‘गौ माता’ कहकर राजनीति करते हैं, लेकिन आज जब उन्हीं गायों की वजह से इंसानों की जान जा रही है, तब वे कहां हैं? क्या गौ माता सिर्फ चुनाव के समय याद आती है? अगर भाजपा सरकार वास्तव में गायों के प्रति इतनी संवेदनशील है तो उन्हें सड़कों पर मरने-मारने के लिए छोड़ने के बजाय सुरक्षित गौशालाओं और उचित व्यवस्था में क्यों नहीं रखा जा रहा?
Rewari, Rewari | Aug 11, 2026