
बेगूसराय: कहने को तो इस क्षेत्र को दो-दो माननीय विधायकों (बछवाड़ा एवं तेघड़ा) का प्रतिनिधित्व हासिल है, उनके क्षेत्र में सड़क का बुरा हाल
संवाददाता भगवानपुर मुकेश कुमार
लेकिन धरातल की हकीकत यह है कि भगवानपुर-पिपरा पथ पर चलने वाले राहगीर और स्थानीय निवासी आज "भगवान भरोसे" जीने को मजबूर हैं। लगभग 25 दिन पहले चमचमाती सड़क बनाने के नाम पर पुरानी पिच को उखाड़ तो दिया गया, लेकिन उसके बाद जनता को धूल और गिट्टी के समंदर में तड़पने के लिए छोड़ दिया गया।
जब स्थानीय मीडिया और अखबारों में इस बदहाली की खबरें प्रमुखता से छपीं, तो विभाग की कुंभकर्णी नींद थोड़ी टूटी। आनन-फानन में पेट्रोल पंप की तरफ से गिट्टी और मोरम गिराने का काम शुरू भी किया गया। लेकिन अफसोस ! यह सक्रियता महज एक घंटे के 'दिखावे' तक ही सीमित रही। एक घंटे गाड़ी चली, थोड़ा काम हुआ और फिर अचानक काम को बंद कर दिया गया।धूल का गुबारझाडूधूल का गुबार और 'दिनभर झाडू' लगाने की मजबूरीइस सड़क की सबसे दर्दनाक तस्वीर पिपरा देवस बाबा स्थान के पास देखने को मिल रही है। यहां उड़ती धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।घरों में कैद जिंदगी: जिन लोगों के घर सड़क के ठीक किनारे हैं, उनकी हालत नरकीय हो चुकी है। घर के कमरों, बर्तनों और बिस्तरों पर धूल की मोटी परत जम रही है।दिनभर झाड़ू लगाने की बेबसी: स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें दिन में दर्जनों बार झाड़ू लगाना पड़ता है, फिर भी धूल से निजात नहीं मिलती।
सांसों पर संकटउड़ते धूलकणों के कारण बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। लोग सर्दी, खांसी और दमे जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।गिट्टी बनी राहगीरों के लिए 'काल'सड़क पर बिखरी नुकीली गिट्टियों के कारण मोटरसाइकिल चालकों का चलना दूभर हो गया है। आए दिन गाड़ियां फिसल रही हैं और लोग चोटिल हो रहे हैं। उड़ती धूल के कारण विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है कि सामने से आ रहा वाहन भी दिखाई नहीं देता, जिससे हर वक्त बड़े हादसे का डर बना रहता है। दो-दो माननीय... फिर भी जनता बेसहारा ?स्थानीय जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि इस क्षेत्र में बछवाड़ा और तेघड़ा दोनों विधानसभाओं की सीमाएं और प्रभाव जुड़ते हैं। दो-दो विधायकों के होने के बावजूद इस सड़क की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जनता की हुंकारः "हम लोगों ने विधायकों जी से भी गुहार लगाई, हाथ-पैर जोड़े, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। अगर दोनों विधायक जी थोड़ा सा भी दबाव बनाते और इसपर विशेष ध्यान देते, तो यह सड़क कब की बनकर तैयार हो जाती। हमें इस धूलकण के नरक से कब निजात मिलेगी, यह बताने वाला कोई नहीं है।"