
मौत और जिंदगी के बीच दौड़ी 102 एंबुलेंस, तीन दिनों की जंग के बाद कोबरा के जहर को मात देकर घर लौटी नन्ही नैन्सी
प्रेस विज्ञप्ति 503, दिनांक 25.06.2026
किशनगंज जिला अन्तर्गत किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की असली सफलता तब मानी जाती है, जब दूर-दराज के गांव में रहने वाला जरूरतमंद व्यक्ति भी समय पर उपचार प्राप्त कर सके। किशनगंज जिले में संचालित 102 एंबुलेंस सेवा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर जीवन बचाने का कार्य कर रही हैं।कटेलबड़ी गांव की एक मासूम बच्ची नैन्सी प्रवीण के लिए बीस जून का दिन किसी भयावह सपने से कम नहीं था। खेलते समय उसे एक जहरीले कोबरा सांप ने काट लिया। कुछ ही देर में उसके शरीर पर जहर का असर दिखने लगा। बच्ची की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और परिजनों के सामने अपनी बेटी को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई।
जब हर पल था कीमती, 102 एंबुलेंस सेवा आशा की किरण बनकर सामने आई
परिजन तत्काल नैन्सी को बहादुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, किशनगंज रेफर कर दिया। परिवार घबराया हुआ था और समय तेजी से निकल रहा था। इसी दौरान 102 एंबुलेंस सेवा आशा की किरण बनकर सामने आई। सूचना मिलते ही चालक संदीप कुमार और ईएमटी देवराज कुमार मौके पर पहुंचे। दोनों ने बिना समय गंवाए बच्ची को एंबुलेंस में शिफ्ट किया और सदर अस्पताल के लिए रवाना हो गए।
रास्ते भर चलती रही जिंदगी बचाने की जंग
सदर अस्पताल तक का सफर आसान नहीं था। बच्ची की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी। ऐसे समय में चालक संदीप कुमार ने कुशल ड्राइविंग और त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए कम समय में एंबुलेंस को अस्पताल तक पहुंचाया। वहीं ईएमटी देवराज कुमार ने पूरे रास्ते बच्ची की निगरानी करते हुए आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई।परिजनों के अनुसार उस समय एंबुलेंस केवल एक वाहन नहीं थी, बल्कि उनकी बेटी के जीवन की आखिरी उम्मीद बन चुकी थी।
तीन दिनों की अथक मेहनत के बाद मिली जीत
सदर अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने नैन्सी के उपचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। लगातार तीन दिनों तक चले इलाज और निगरानी के बाद आखिरकार बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ। चिकित्सकों की मेहनत रंग लाई और नैन्सी पूरी तरह स्वस्थ होकर खतरे से बाहर आ गई।जब डॉक्टरों ने बच्ची को स्वस्थ घोषित किया तो उसके पिता सेदर रहमान की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा कि जिस बेटी को खोने का डर उन्हें सता रहा था, वह आज फिर से मुस्कुरा रही है।
बेटी को नया जीवन मिला, पिता ने किया सम्मान
अपनी बेटी के स्वस्थ होने के बाद सेदर रहमान स्वयं सदर अस्पताल पहुंचे और 102 एंबुलेंस के चालक संदीप कुमार तथा ईएमटी देवराज कुमार को सम्मानित कर उनका आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा की अगर एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचती और कर्मियों ने तत्परता नहीं दिखाई होती, तो शायद मेरी बेटी को बचाना मुश्किल हो जाता। आज मेरी बेटी हमारे बीच है तो इसमें एंबुलेंस कर्मियों और चिकित्सकों का बहुत बड़ा योगदान है।
स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का सशक्त उदाहरण
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने इस घटना को स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता का उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकार की मंशा है कि जिले के अंतिम व्यक्ति तक समय पर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचे। 102 एंबुलेंस सेवा इसी उद्देश्य को साकार कर रही है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर पहुंचने वाली स्वास्थ्य सेवाएं अनेक परिवारों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही हैं।सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि यह घटना एंबुलेंस कर्मियों, चिकित्सकों और स्वास्थ्य व्यवस्था के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश जैसी आपात स्थितियों में समय पर अस्पताल पहुंचना सबसे महत्वपूर्ण होता है। नैन्सी की जान बचना इस बात का प्रमाण है कि यदि मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो गंभीर परिस्थितियों में भी सकारात्मक परिणाम संभव हैं।
प्रतिदिन दर्जनों लोगों तक पहुंच रही जीवनरक्षक सेवा
क्लस्टर लीडर आशिफ रहमानी ने बताया कि पहले कई ग्रामीण इलाकों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में काफी समय लग जाता था, लेकिन अब बेहतर तकनीक और समन्वय के कारण एम्बुलेंस तेजी से लोगों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश रहती है कि कॉल मिलने के तुरंत बाद मरीज तक एम्बुलेंस पहुंचे। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर सेवा उपलब्ध कराई जाती है। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मरीजों की जान बचाने में मदद मिल रही है और लोगों का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर मजबूत हुआ है।उन्होंने बताया की जिले में 102 एंबुलेंस सेवा प्रतिदिन 62 से अधिक मरीजों को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। जून माह में अब तक लगभग 1800 से अधिक मरीज इस सेवा का लाभ प्राप्त कर चुके हैं।जिले में वर्तमान में कुल 34 एंबुलेंस संचालित हैं, जिनमें 8 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट , 24 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस तथा 2 शव वाहन शामिल हैं। चौबीसों घंटे संचालित ये वाहन शहर से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रहे हैं।नैन्सी की कहानी केवल एक बच्ची के स्वस्थ होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की कहानी है जो लोगों का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर मजबूत हो रहा है। यह कहानी बताती है कि जब एंबुलेंस समय पर पहुंचे, स्वास्थ्यकर्मी तत्पर हों और चिकित्सक समर्पित हों, तब जिंदगी की जंग जीती जा सकती है।यह संस्करण राष्ट्रीय स्तर की सफलता कहानी की शैली में तैयार किया गया है, जिसमें मानवीय भावनाएं, स्वास्थ्य व्यवस्था की भूमिका, प्रशासनिक दृष्टिकोण और 102 एंबुलेंस सेवा के प्रभाव को प्रमुखता से दर्शाया गया है। District Kishanganj Bihar Health Department
#viralpost
#viralreelschallenge
#viralchallenge
#newyork
#2026Goals
#allflowers
#Kishanganj