
सेवा संकल्प अभियान 2026: सेवा की कहानी
प्राकृतिक खेती से बढ़ी आय, वर्मी कंपोस्ट से हर साल ₹3 से ₹5 लाख की अतिरिक्त कमाई
सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत 'कहानी सेवा की' श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं, सागर जिले के केसली विकासखंड के ग्राम ऊंटकटा टडा निवासी किसान राघवेंद्र गौड की, जिन्होंने उद्यानिकी विभाग की योजनाओं और मार्गदर्शन से पारंपरिक खेती को आय, रोजगार और प्रकृति संरक्षण का माध्यम बनाया है।
राघवेंद्र गौड पहले पारंपरिक तरीके से खेती करते थे। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं और अधिकारियों के मार्गदर्शन से उन्हें कम लागत वाली प्राकृतिक एवं लाभकारी खेती अपनाने की प्रेरणा मिली। विभागीय योजना के अंतर्गत उन्होंने अपने खेत में आम का बगीचा स्थापित किया। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाई, जिस पर उन्हें 50 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। आज राघवेंद्र अपने खेत के गोबर और जैविक सामग्री से वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं। इसका उपयोग वे अपनी खेती में करने के साथ बाजार में बिक्री भी करते हैं। इससे उन्हें हर वर्ष लगभग 3 से 5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
राघवेंद्र प्राकृतिक पद्धति से अदरक, हल्दी, धान और अरहर जैसी फसलों का उत्पादन करते हैं। उनके खेत में जीवामृत बनाने की यूनिट भी स्थापित है। जीवामृत के उपयोग से वे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। प्राकृतिक तरीके से उत्पादित फसलों की गुणवत्ता के कारण उन्हें कई बार सामान्य बाजार मूल्य की तुलना में बेहतर दाम भी मिलते हैं। राघवेंद्र गौड का मानना है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका सही उपयोग करने और खेती में नई तकनीक एवं प्राकृतिक पद्धतियां अपनाने से कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी यह पहल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है।
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